रेलवे ने नए साल से पहले उदयपुर के व्यवसायियों को बड़ी सौगात दी है। खेमली कंटेनर डिपो से मुंद्रा पोर्ट के लिए 45 कंटेनर की नई शिपिंग वैन शुरू की गई है। इसमें एक बार में 2800 टन माल भेजा जा सकेगा। शिपिंग वेन से गुजरात में स्थित इस पोर्ट तक माल पहुंचाने में आसानी होगी। अभी तक डिपो पर रेलवे के खुद के कंटेनर नहीं थे। इससे व्यापारियों को माल भेजने के लिए निजी कंपनियों से कंटेनर किराये पर लेने पड़ते थे। यह प्रक्रिया महंगी होने के साथ समय भी ज्यादा लेती थी। उदयपुर से मुंद्रा पोर्ट तक माल भेजने के लिए निजी ट्रांसपोर्ट कंपनियां प्रति टन 1300 रुपए किराया लेती हैं। ऐसे में 40 टन का कंटेनर भेजने का करीब 52 हजार रुपए किराया बनता है। रेलवे का संभावित किराया 1 हजार रुपए प्रति टन है। ऐसे में 40 टन माल भेजने में 40 हजार रुपए खर्च आएगा। इससे व्यापारियों के प्रति कंटेनर 10 से 12 हजार रुपए की बचत होगी। ट्रक को फैक्ट्री से माल लोड करने और पोर्ट पहुंचने में करीब दो दिन का समय लगता है। जबकि, ट्रेन में यह समय 30 से 35 घंटे का रहेगा। फायदा… क्वार्ट्ज, मार्बल, सेंड स्टोन, कृषि उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट सीधे पोर्ट पहुंचेंगे उदयपुर से मुंद्रा पोर्ट की दूरी 700 किमी है। ट्रेन को पोर्ट तक पहुंचने में 30 से 35 घंटे का समय लगेगा। ट्रेन उदयपुर, हिम्मतनगर होते हुए जाएगी। शुरुआत में डिमांड के हिसाब से इसका संचालन किया जाएगा। इससेे उदयपुर जिले से फेल्सफार, क्वार्ट्ज, मार्बल, सेंड स्टोन, कृषि उत्पाद, हैंडीक्राफ्ट आदि चीजों को आसानी से पोर्ट भेजा जा सकेगा। बता दें कि डिपो का संचालन कंटेनर काॅर्पोरेशन ऑफ इंडिया (काॅनकोर) करेगा। खेमली डिपो से फैक्ट्री तक आने-जाने के लिए ट्रक और ट्राेले की व्यवस्था भी कॉनकोर ही मुहैया करवाएगा। कस्टम क्लीयरेंस मूंदड़ा पोर्ट पर होगा। व्यवसायी बोले- किराये में थोड़ी और रियायत दे रेलवे
उदयपुर चैंबर ऑफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्री अध्यक्ष एमएल लूणावत का कहना है कि डिपो को किराये में बदलाव करना चाहिए। डिपो से ट्रेन पूरी भरने के बाद रवाना ही होगी। ऐसे में पोर्ट तक माल पहुंचने में 10 दिन का समय भी लग सकता है। जबकि ट्रक एक-दो दिन में वहां पहुंच जाएंगे। ऐसे में रेलवे को किराये में थोड़ी और रियायत देनी चाहिए। दक्षिण भारत के लिए भी ऐसी ही शिपिंग वेन शुरू करने की जरूरत है।


