इंदौर में नशे के खिलाफ आगे आए शहरकाजी:इमामों की ली बैठक; बोले- माता-पिता अपने बच्चों की तालिम और सौबत का रखे ख्याल

इंदौर में नशे के खिलाफ शहरकाजी डॉ. इशरत अली भी उतर चुके हैं। हाल ही में उनका एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे कह रहे हैं कि “आप मुझे नशा बेचने वालों के नाम बताओ, मैं उनके टांगे तोड़ दूंगा।” उनका कहना है कि अगर सभी मिलकर कोशिश करेंगे, तो इंदौर को नशामुक्त बनाया जा सकता है। इस मामले में दैनिक भास्कर ने शहरकाजी डॉ. इशरत अली से खास चर्चा की। उन्होंने कहा कि शुरू से इंदौर में नशा बिक रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से ड्रग्स बिकने लगी है। ड्रग्स वालों के खिलाफ पुलिस और शासन भी सक्रिय हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी नशे के खिलाफ काम कर रहे हैं। मुस्लिम समाज की तरफ से यह सुनने में आ रहा था कि लाखों में ड्रग्स बिक रही है। खजराना में एक स्कूल के कार्यक्रम में वह मौजूद थे, जहां उन्होंने लोगों से अपील की थी कि जो भी नशा बेचने वाले लोग हैं, उनकी जानकारी दें, क्योंकि समाज को सुधारना है और बुराईयों को खत्म करना है। हद तो यह हो गई है कि खजराना में महिलाएं भी नशा बेच रही हैं। 15 दिन पहले इमामों की मीटिंग ली शहरकाजी डॉ. इशरत अली ने बताया कि 15 दिन पहले उन्होंने शहर के तमाम मस्जिदों के इमामों के साथ एक मीटिंग की थी। इसमें उन्होंने गुजारिश की थी कि अपने इलाके में नशा बेचने वालों के बारे में जानकारी दें। इसके साथ ही, जो नाबालिग बच्चे नशे के आदि हो गए हैं, उन्हें नशा मुक्ति केंद्र भेजने की अपील की थी, ताकि उनकी जिंदगी को सही दिशा में लाया जा सके। यह एक मुहिम है, जो एक दिन में खत्म नहीं हो सकती उन्होंने कहा कि हर काम के लिए पुलिस को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। जब कोई व्यक्ति नशा कर रहा है, तो इसका मतलब है कि नशा बिक रहा है। नशा बेचने वालों की जानकारी हम पुलिस को देते हैं और अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो पुलिस दोषी होगी। यह एक मुहिम है, जो एक दिन में खत्म नहीं हो सकती। शासन, पुलिस, प्रशासन और समाज के हर तबके को इसमें जुड़कर काम करना होगा, तभी इंदौर को नशामुक्त बनाया जा सकेगा। माता-पिता को दिया संदेश शहरकाजी ने नशे के बारे में माता-पिता को भी एक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माता-पिता अपने बच्चों की तालीम, तरबियत और संगत का ध्यान रखें। यह जानें कि उनका बच्चा कहां जा रहा है और क्या कर रहा है। नशा तो नहीं कर रहा है, और वह गलत संगत में तो नहीं है। अगर माता-पिता अपने बच्चों को सही दिशा में रखें, तो समाज में सुधार आ सकता है।

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