समक्का सागर बैराज को एनओसी मिली तो 10.9 वर्ग किमी क्षेत्र डूबेगा

रायपुर, समक्का सागर बैराज को लेकर तेलंगाना ने छत्तीसगढ़ से सरकार से एनओसी मांगा है। राज्य सरकार एनओसी देने पर अफसरों के साथ लगातार मंथन कर रही है लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है। हालांकि, एक अध्ययन के अनुसार समक्का सागर बैराज बनने से छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर जिले के 11 किलोमीटर क्षेत्र में वन भूमि के साथ ही खेती की जमीन और सरकारी जमीन जलमग्न हो जाएंगे। समक्का सागर बैराज को लेकर आईआईटी- खड़गपुर द्वारा किए गए तुलनात्मक अध्ययन के अनुसार चरम बाढ़ की स्थिति में बीजापुर जिले के कोटूर, तारलागुडा, गंगाराम, कम्बलपेटा और सीतांगाराम गांवों की लगभग 10.9 वर्ग किलोमीटर भूमि जलमग्न हो जाएगी। इसमें कृषि, वन और सरकारी भूमि भी शामिल होगी। हालांकि, बैराज नहीं बनने की दशा में भी 10.5 वर्ग किमी क्षेत्र की जमीनें डूबेंगी। बैराज बनने पर डूब के क्षेत्र में 40 हेक्टेयर की वृद्धि हो जाएगी। चरम बाढ़ की स्थिति में बैराज में 36 लाख क्यूसेक पानी होगा, जो 93 मीटर के हाई फ्लड के लेवल पर पहुंच जाएगा, सामान्य बाढ़ की दशा में वॉटर लेवल 90.87 मीटर होगा। तीन साल पहले बन जाना था बैराज समक्का सागर बैराज को 2022 में पूरा हो जाना था लेकिन विभिन्न कारणों से यह अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। बता दें कि बैराज का निर्माण 2017 में शुरू हुआ था। समक्का सागर बैराज को एनओसी देने पर विचार समक्का सागर बैराज के लिए तेलंगाना सरकार ने एनओसी की मांग की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सोमवार को जल संसाधन विभाग के कामकाज की समीक्षा की। बैठक में समक्का सागर बैराज को एनओसी देने का विषय भी चर्चा में आया। सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार एनओसी देने पर विचार कर रही है।

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