खंडवा कोर्ट में सोमवार को एक रोचक मामला सामने आया। एक प्रकरण में कांग्रेस पार्षद व नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर को पेश होना पड़ गया। इस दौरान कोर्ट में राठौर के सिवाय ना उनका वकील था, ना ही कोई जमानतदार। कोर्ट ने पूछा तो कहा कि मैंने गुनाह क्या किया है? गुनाहगार हूं तो जेल भेज दीजिए। आखिर में निवेदन करने पर कोर्ट ने 10 हजार के मुचलके पर जमानत देकर छोड़ दिया। मामला महापौर की गाड़ी का चालान काटने से जुड़ा है। भाजपा नेताओं के विरोध के बाद कोतवाली पुलिस ने नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर के खिलाफ धारा 188 के तहत प्रकरण दर्ज किया था। तर्क यह था कि राठौर ने नगर निगम परिसर में बगैर अनुमति के रेडियो माइक (ध्वनि यंत्र) का उपयोग किया। इसी केस में सोमवार को पुलिस ने सीजेएम कोर्ट के समक्ष चालान पेश किया। राठौर को फोन पर सूचना देकर कोर्ट के समक्ष बुलाया गया था। राठौर बोले- दबाव में नहीं आऊंगा, जेल जाने काे तैयार था
कोर्ट से बाहर आने के बाद नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर ने कहा कि मैंने ऐसा कौन-सा गुनाह किया था। पुलिस ने पहले तो दबाव में मुझ पर फर्जी केस लाद दिया। आज अचानक टीआई का फोन आता है कि कोर्ट आ जाओ। कोर्ट जाकर पता चला कि फलाने केस में पुलिस ने चालान पुटअप किया है। मजिस्ट्रेट के सामने जमानतदार भी मौजूद नहीं था। मैंने कहा कि ऐसा क्या गुनाह किया। क्योंकि मुझे साजिश के तहत किसी के बर्थडे पर जेल भेजने की तैयारी थी। अचानक जमानतदार कहां से लाऊं, मैं जेल जाने को तैयार हो गया। कोर्ट ने 10 हजार के मुचलके पर जमानत देने का फैसला लिया। पुलिस के लोग यहीं कहते रहे कि हम पर आज ही चालान पेश करने का दबाव था। मैं जेल चले जाऊंगा लेकिन किसी के दबाव में नहीं आऊंगा। चर्चा में आया था चालान केस, ट्रैफिक टीआई अटैच हो चुके
घटना 13 सितंबर 2024 की है। नगर निगम परिसर में पहुंचे ट्रैफिक टीआई सौरभसिंह कुशवाह ने महापौर के सरकारी वाहन का चालान काट दिया। कारण- गाड़ी की नंबर प्लेट पर बॉस लिखा था। इस दौरान खूब हंगामा हुआ। ऊपर से चालान की भरपाई खुद नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर ने कर दी। कार्रवाई के विरोध में भाजपा के तमाम नेता इकट्ठे हो गए। एसपी-कलेक्टर से नेता प्रतिपक्ष और टीआई की शिकायत की। मामला इतना गर्माया कि सोशल मीडिया पर पूर्व सीएम दिग्विजयसिंह ने भी पोस्ट की। नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर के खिलाफ 188 के तहत प्रकरण दर्ज हो गया। 8 अक्टूबर को टीआई सौरभ सिंह का ट्रांसफर हो गया। उन्हें पुलिस मुख्यालय भोपाल में अटैच किया गया।


