हनुमानगढ़ में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सुरेन्द्र दादरी ने नई जीएसटी दरों पर केन्द्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जनता को नुकसान पहुंचाने वाले फैसले लिए और अब उन्हीं बातों को लागू कर रही है जिन्हें पहले राहुल गांधी ने कहा था। राहुल गांधी की ओर से वोट चोरी का खुलासा करने के बाद जन-आधार खिसकता देख और बिहार चुनाव को देखते हुए जीएसटी कम करने का मोदी सरकार का फैसला वोट बटोरने की कवायद से ज्यादा कुछ नहीं है। दादरी ने मंगलवार को केन्द्र सरकार की जीएसटी नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा कि जीएसटी को लेकर प्रधानमंत्री बार-बार देश के नाम पर भाषण देते रहे, लेकिन आखिर ऐसा क्या था जिसके लिए बार-बार कहा गया कि यह देश के लिए जरूरी है? कौन-सी आपत्ति या कौन-सा बड़ा फायदा देश को मिलने वाला था? विज्ञापनों पर लुटाई जनता की कमाई उन्होंने कहा, मोदी सरकार ने पहले जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ाया, फिर थोड़ा घटाकर खूब प्रचार कर रही है और कमाल ये कि अंधभक्त ताली भी बजा रहे हैं। जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा टैक्स के रूप में वसूल कर यह बताने के लिए विज्ञापनों पर लुटाया जा रहा है, लेकिन जनता पर टैक्स लगाकर या उसे घटाकर जश्न नहीं मनाए जाते। किसानों की आय दोगुनी करने का झांसा डीसीसी अध्यक्ष ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अतिवृष्टि से फसलों का नुकसान व गरीबों के कच्चे मकान गिरे, उनको राहत देने की कोई बात नहीं हो रही। किसानों की आय दोगुनी कर झांसा देकर सत्ता में आए लेकिन केन्द्र सरकार धान सहित अन्य फसलों को समर्थन मूल्य पर खरीदने की बात नहीं कर रही। हालांकि जीएसटी कम करने की मांग कांग्रेस की ओर से जब से जीएसटी लगा तब से की जा रही है और जनता को राहत मिले, इसका हम स्वागत करते हैं। समय परिस्थिति और लेकिन सरकार की मंशा पर सवाल उठाने लाजिमी हैं। 55 लाख करोड़ रुपए अतिरिक्त वसूले उन्होंने पीएम नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने पिछले आठ सालों में 55 लाख करोड़ रुपए अतिरिक्त वसूले हैं। अब जनता को बेवकूफ बनाने की कोशिश की जा रही है और मामूली राहत को उत्सव का नाम दिया जा रहा है। जबकि जीएसटी के नाम पर छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ दी गई। यह गब्बर सिंह टैक्स है उन्होंने कहा कि 2017 में राहुल गांधी ने बोल दिया था कि यह गब्बर सिंह टैक्स है। राहुल ने कहा था कि 5 परसेंट और 18 परसेंट टैक्स का स्लैब होना चाहिए। कम से कम दर्जनों ऐसी बातें हैं, जिन्हें राहुल गांधी ने कहा और सरकार को बाद में मानना पड़ा। जब सरकार खुद रास्ता नहीं बना पा रही और राहुल गांधी की बातें ही लागू करनी पड़ रही हैं, तो सत्ता से हट जाना ही बेहतर है।


