बिलासपुर में आवारा मवेशियों से बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। 4 सितंबर को सीआरपीएफ कैंप भरनी के पास हुए हादसे में एक रिटायर्ड शिक्षक समेत दो लोगों की मौत और तीन महिलाओं के घायल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह ने पशु प्रबंधन को लेकर समीक्षा बैठक की। अधिकारियों ने पाया कि अधिकतर हादसे रात 10 से सुबह 2 बजे के बीच होते हैं। इसलिए इस दौरान विशेष गश्त का आदेश दिया गया है। प्रशासन ने टीमों को निर्देश दिए हैं कि अगर सड़कों पर झुंड में मवेशी मिलें तो उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाए। मवेशियों की पहचान के लिए टैग लगाए जाएंगे। ग्रामीणों और कोटवार की मदद से मवेशी मालिकों की पहचान कर उनके खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज की जाएगी। कलेक्टर ने पिछले दिनों हुए हादसों में मृत मवेशियों के मालिकों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। प्रशासन का मानना है कि निरंतर कार्रवाई से ही सड़कों पर मवेशियों से होने वाले हादसों को रोका जा सकता है। ग्रामीणों को जिम्मेदार बनाने पर जोर बताया गया कि अब तक लगभग 12 मवेशी मालिकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। कलेक्टर ने इसके लिए ग्रामीणों को जिम्मेदार और जागरूक करने पर भी जोर दिया। उन्होंने सभी एसडीएम, जनपद पंचायत, सीएमओ की बैठक लेकर सड़क हादसा रोकने के दिशा-निर्देश दिए। गोधाम स्थापना के निर्देश उन्होंने कहा कि सभी अपने-अपने काम की जिम्मेदारी लें, तभी हादसों पर लगाम लगेगी। कलेक्टर ने बैठक में गोधाम स्थापना की प्रगति की भी समीक्षा की। अब तक केवल 5 स्थानों से पंचायत प्रस्ताव आए हैं। उन्होंने अधिकाधिक पंचायतों से प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। ताकि इनकी स्थापना कर बेसहारा मवेशियों को आश्रय दिया जा सके।


