सरगुजा में हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने अंबिकापुर में एक दिवसीय धरना दिया और हसदेव क्षेत्र में कोल परियोजनाओं को मंजूरी दिए जाने को लेकर सरकार पर हमला बोला। वक्ताओं ने कहा कि खनन परियोजनाओं से ऐतिहासिक रामगढ़ पहाड़ का अस्तित्व खतरे में है। ब्लास्टिंग के कारण रामगढ़ को क्षति पहुंच रही है। नई कोल परियोजना को मंजूरी दिए जाने से हसदेव क्षेत्र में कुल 12 लाख पेड़ कट जाएंगे जो छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी क्षति है। समिति ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। हसदेव क्षेत्र में पूर्व में संचालित कोल परियोजनाओं के बाद केते एक्सटेंशन को मंजूरी देने के खिलाफ हसदेव बचाओ संघर्ष समिति ने मोर्चा खोल दिया है। गांधी चौक में आयोजित धरना प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। धरने को संबोधित करते हुए समिति के सदस्य आलोक शुक्ला ने कहा कि केते एक्सटेंशन परियोजना को भी मंजूरी दी गई तो हसदेव क्षेत्र में वर्तमान में संचालित कोल परियोजनाओं को मिलाकर कुल 12 लाख पेड़ कट जाएंगे। रामगढ़, एलिफेंट कारीडोर की भी अनदेखी
आलोक शुक्ला ने कहा कि हसदेव क्षेत्र एलिफेंट कारीडोर में है। खदानों में हो रही ब्लास्टिंग के कारण रामगढ़ पर्वत खतरे में है। हसदेव क्षेत्र में कई विलुप्तप्राय, संकटपूर्ण श्रेणी की वनस्पति, वन्य जीव और पक्षी पाए जाते हैं। कोयला उत्खनन से हसदेव अरण्य और संपूर्ण छत्तीसगढ़ पर गंभीर पर्यावरणीय संकट की स्थिति पैदा हो गई है। जंगल के विनाश से हाथियों का प्राकृतिक रहवास और उनके आने जाने का रास्ता लगातार ख़त्म हो रहा है जिससे हाथी रहवासी इलाकों में आ रहे हैं। विस के संकल्प के बाद भी अनुमति
धरने को भानू प्रताप सिंह, त्रिभुवन सिंह, उमेश्वर सिंह आर्माे, आनंद प्रकाश व अन्य वक्ताओं ने संबोधित किया। धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि दिनांक 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा के सदन में सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के सभी सदस्यों की उपस्थिति में एक अशासकीय संकल्प “हसदेव अरण्य क्षेत्र के सभी कोल ब्लॉक निरस्त किए जाएं” पारित हुआ था। भारतीय वन्य जीव संस्थान ने हसदेव की जैव विविधता अध्ययन रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि हसदेव में एक भी कोयला खदान खुलने से छत्तीसगढ़ में मानव हाथी संघर्ष की स्थिति विकराल हो जाएगी। छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जन जाति आयोग ने परसा कोल ब्लॉक की ग्रामसभाओं की जांच में पाया कि वन स्वीकृति हेतु ग्रामसभाओं के प्रस्ताव फर्जी और कूट रचित तरीके से बनाए गए थे। आयोग द्वारा शासन को प्रेषित अपनी अनुशंसा में परसा कोल ब्लॉक को दी गईं वन स्वीकृति निरस्त करने का आग्रह किया है। राज्यपाल एवं सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
हसदेव बचाओ समिति ने आंदोलन में सभी भाजपा एवं कांग्रेस नेताओं को शामिल होने की अपील की थी, लेकिन संघर्ष समिति से जुड़े लोगों के अलावे भाजपा-कांग्रेस के नेता आंदोलन में नहीं दिखे। धरना के बाद मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम अंबिकापुर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में हसदेव अरण्य क्षेत्र को पुनः नो-गो क्षेत्र घोषित करने, रामगढ़ को बचाने के लिए पहल करने, केते एक्सटेंशन की अनुमति निरस्त करने सहित अन्य मांगें शामिल हैं।


