आजमगढ़ में श्रीरामलीला में बाबा बैजनाथ रामलीला मंडल जनकपुर मिथिलाधाम (बिहार) के कलाकारों ने ताड़का वध और सीता जन्म का मंचन किया। शुरुआत भगवान की झांकी की आरती से हुई। ताड़का वध के बाद लगे जयकारों से पंडाल गूंजा उठा। नवरात्रि के मौके पर पुरानी कोतवाली पर आयोजित रामलीला माता सीता के जन्म की लीला का मंचन कलाकारों द्वारा किया गया। मंचन की शुरूआत ताड़का वध से होता है। ऋषि विश्वामित्र राम-लक्ष्मण को लेकर ताड़का वन में पहुंचते हैं। राम और लक्ष्मण ऋषि विश्वामित्र को यज्ञ करने को कहते है। धनुष बाण साधकर यज्ञ की रक्षा करने के लिए तैयार होते है। राक्षसी ताड़का यज्ञ शुरु होते ही आकर यज्ञ विध्वंश करना चाहती है। राम-लक्ष्मण को देखकर क्रोधित होती है। श्रीराम के हाथों ताड़का का वध हो जाता है। इस दौरान जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। मंचन की अगली कड़ी में दिखाया गया कि राजा जनक के राज्य जनकपुर में पूरी तरह से अकाल पड़ गया है। लोग दाने-दाने को लेकर भूखे-प्यासे त्राहिमाम कर रहे हैं। लोग दूसरे राज्य जाने को घर से निकलने लगे हैं। इस गंभीर समस्या पर राजा जनक ने ज्योतिषाचार्य को बुलाकर समस्या का हल निकालने को कहा। ज्योतिष ने हल बताते हुए कहा कि यदि सोने का हल बनवाकर खेतों में ढाई गुना जोतने पर जनकपुर का अकाल खत्म हो जाएगा। राजा ने वैसा ही किया। सोने के हल से शुरू हुई खेत की जुताई सोने का एक हल बनवाया और खेत जोतना शुरू कर दिया। कुछ देर जोतने के बाद हल एक जगह अटक गया। जब रुककर देखा गया तो जमीन के नीचे एक घड़ा मिला जिससे सीता जी का जन्म हुआ। सीता के जन्म की लीला शुरू होते ही लोग काफी उत्साहित हो उठे। इस दौरान जय श्री राम और जय सीता माता के जयकारों से पूरा पांडाल गूंज उठा।


