सौरभ श्रीवास्तव | लुधियाना लुधियाना के दुगरी 200 फुटी रोड पर रामलीला मैदान में इस साल भी हेमंत कुमार अपने पुराने जज़्बे और दोस्ती के साथ रावण के किरदार में लौट आए हैं। पिछले साल हुए स्कूटी हादसे के कारण उनका पैर टूट गया था, लेकिन इस साल भी उनकी हिम्मत और जुनून कम नहीं हुआ। मंच पर राम और लक्ष्मण का किरदार निभाने वाले मनमोहन सिंह और राज कुमार उनके सच्चे दोस्त बने हुए हैं—दोस्ती, सहयोग और अपनापन इस टीम की पहचान है। हेमंत कुमार का पैर अभी पूरी तरह ठीक नहीं है, फिर भी वे हर डायलॉग की प्रैक्टिस करते हैं और मंच पर उतरने को तैयार हैं। उनके साथी हर रोज़ अभ्यास और भूमिका की तैयारी में साथ देते हैं, ताकि मंच पर युद्ध की दृढ़ता रहे और मंच के बाहर दोस्ती की मिसाल कायम हो।वर्तमान में हेमंत और उनके मित्रों के मन में उत्साह और हार न मानने का जोश है। मंच पर रावण, राम और लक्ष्मण के बीच संघर्ष तो दिखेगा ही, लेकिन असल जिंदगी में ज़मीन पर उतरते ही तीनों की गहरी दोस्ती, विश्वास और परस्पर सहयोग दर्शकों को अपनापन महसूस कराएगा। हेमंत कहते हैं कि रावण का रोल आसान नहीं, लेकिन टीम की दोस्ती और उनके अपने जुनून ने हर मुश्किल को पार कर दिया है। इस दौर में उनके मन में बस एक ही बात है—दर्शकों के सामने फिर से पूरी ताकत और अपनापन के साथ रावण की भूमिका निभाना, ताकि लुधियाना की रामलीला की विरासत को नई ऊर्जा मिले। राम, लक्ष्मण और रावण के ये तीन दोस्त इस साल भी मंच पर दुश्मनी और असल जिंदगी में दोस्ती का संदेश दे रहे हैं। 25 साल पुरानी दोस्ती और हेमंत का जुनून दर्शकों को सिर्फ अभिनय नहीं बल्कि सच्ची दोस्ती, समर्पण और मेहनत की मिसाल दिखा रहा है। दुगरी 200 फुटी रोड पर हो रही रामलीला के रावण का किरदार निभाने वाले हेमंत कुमार अपने किरदार और जुनून के कारण लोगों के लिए रोल मॉडल बन गए हैं। पैर टूटा, दर्द था, मगर उन्होंने हार नहीं मानी। दोस्ती ने उनका हौसला और भी बढ़ा दिया। यही वजह है कि रामलीला मंच पर जब वे रावण का संवाद बोलते हैं तो दर्शकों की आंखें भीग जाती हैं। वे जानते हैं कि यह सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक कलाकार की लगन और दोस्ती की सच्ची कहानी है। इसके अलावा हेमंत कुमार बताते हैं कि रामलीला से लगाव बचपन से ही रहा है। उनके पिता, ताया, चाचा और भाई सभी रामलीला में अलग-अलग किरदार निभाते थे। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने भी मंच संभाला। ढंड फैमिली का नाम रामलीला में अहमदगढ़ और आसपास सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है। उन्हें पिता और ताया ने हमेशा सिखाया कि किसी भी किरदार को निभाने से पहले उसे जीना जरूरी है। हेमंत मानते हैं कि रावण का किरदार आसान नहीं है। लोग उसे खलनायक मानते हैं, लेकिन वास्तव में वह वेद, शास्त्र और मंत्रों का महान ज्ञानी था। हेमंत ने पहले पंडितों से संस्कृत मंत्र और श्लोक सीखे। कई दिन तक रावण की तरह जीवन जिया। तभी मंच पर रावण को जी सके।


