रींगस में 840 लीटर मिलावटी दूध नष्ट करवाया गया है। 21 ड्रमों में भरकर ये दूध डेयरियों और दुकानों पर सप्लाई के लिए जा रहा था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक गर्ग ने भैंरूजी मोड़ पर पिकअप रुकवाकर दूध की जांच करवाई। जांच में सूक्रोज की मात्रा अधिक और एसएनएफ (सॉलिड-नॉट-फैट) कम पाया गया। एएसपी दीपक गर्ग ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि क्षेत्र में कुछ दूध की दुकानों और डेयरियों पर मिलावटी दूध की आपूर्ति की जा रही है। इस सूचना पर भैंरूजी मोड़ पर एक पिकअप वैन को रोककर जांच की गई। 21 ड्रमों में भरा था 840 लूट दूध
जांच के दौरान, अरणियां निवासी राकेश यादव (26) पुत्र श्यामलाल यादव 21 ड्रमों में 840 लीटर दूध भरकर आपूर्ति के लिए जा रहा था। राकेश से दूध के स्रोत और गंतव्य के बारे में पूछताछ की गई, लेकिन वो संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया और सकपकाने लगा। इसके बाद पिकअप को एएसपी कार्यालय लाया गया और जिला खाद्य सुरक्षा टीम को बुलाया गया। स्वास्थ्य विभाग के खाद्य सुरक्षा अधिकारी फूलसिंह बाजिया और सुरेश कुमार शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। सूक्रोज ज्यादा और एसएनएफ कम पाया गया
टीम ने दूध की जांच की, जिसमें प्रथम दृष्टया ये सिंथेटिक पाया गया। मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब में आगे की जांच करने पर दूध में भारी मात्रा में सूक्रोज मिला, जबकि फैट और एसएनएफ काफी कम थे। जांच के बाद, दूध के दो नमूने लेकर उन्हें आगे की जांच के लिए लैब में भेजा गया। मौके पर ही एक गड्ढा खोदकर 21 ड्रमों में रखा 840 लीटर मिलावटी दूध नष्ट कर दिया गया। एएसपी गर्ग ने कहा कि दूध एक ऐसी खाद्य सामग्री है, जिसका सेवन जन्म लेने वाले बच्चे से लेकर वृद्ध और आमजन सभी करते हैं। सिंथेटिक और नकली दूध से कई तरह की बीमारियों को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने बताया कि ये कार्रवाई “आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर” के सिद्धांत पर की गई है और भविष्य में भी जारी रहेगी, ताकि आमजन के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो सके। इस कार्रवाई में पुलिस लाइन सीकर एएसआई महेश कुमार यादव की सराहनीय भूमिका रही।


