इंदौरी कारोबारी ने लगाए झूठे केस दर्ज कराने के आरोप:सीएम से की मांग-रूसी नागरिक को गिरफ्तार कर न्याय दिलवाएं

इंदौर के कनफेक्शनरी कारोबारी संजय जैसवानी ने रूसी नागरिक गौरव अहलावत पर गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। जैसवानी ने सोमवार को मीडिया के सामने बताया कि साल 2023-24 में मेरी ग्रुप ऑफ कंपनीज की सभी कंपनियों का सालाना टर्न ओवर 1200 करोड़ रुपए था। वहीं, मेरी कंपनी की नेटवर्थ 5 हजार करोड़ रुपए थी, जिसे अहलावत ने जीरो कर दिया है। छह महीने बाद परिवार के सहारे खड़े होकर उन्होंने अब अपनी बात मीडिया के सामने रखी है। जैसवानी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग की है कि इस विदेशी नागरिक को तत्काल गिरफ्तार कर न्याय दिलाया जाए, क्योंकि उसकी वजह से उनका कारोबार पूरी तरह तबाह हो गया है। जैसवानी ने बताया कि मैंने लगभग 80 करोड़ रुपए जीआरबी बिस्किट में निवेश किए, लेकिन मैंने आज तक इसका एक भी प्रतिशत इंटरेस्ट नहीं लिया। मुझे अकाउंटिंग की समझ नहीं थी। इसलिए अहलावत ने इसका पूरा फायदा उठाया। अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर से चोरी का खुलासा होने के बाद अहलावत ने तत्काल जीआरबी बिस्किट के 77 प्रतिशत शेयर मुझे देते हुए मेरी अन्य कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए। बीमार हुआ तो झूठे केस दर्ज कराए
इस दौरान मैं तनाव में रहने लगा तो बीमार होने के चलते मुझे मुंबई में चार्टर प्लेन से ले जाया गया। तब से मेरा इलाज चल रहा था। जैसवानी ने बताया कि इस दौरान अहलावत ने मेरे खिलाफ झूठा केस दर्ज करवा दिया। हमने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। उद्योगपति ने आरोप लगाया कि गौरव ने उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाते हुए 11 लोगों पर एफआईआर दर्ज करवाई थी। हालांकि, वह केस तथ्यों के अभाव में निरस्त हो चुका है। जैसवानी ने बताया कि व्यापार बर्बाद होने और झूठे केस झेलने की वजह से उन्हें दो बार आत्महत्या का ख्याल आया। परिवार के सहारे जिंदा रहे। उन्होंने कहा कि मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इलाज के दौरान भी गौरव ने गंभीर आरोप लगाकर झूठी एफआईआर दर्ज करवाई थी। हाईकोर्ट में केस के बाद मैंने शिकायत की जैसवानी ने बताया कि मेरी अपील के बाद हाईकोर्ट ने केस खारिज कर दिया। इसके बाद मैंने अहलावत के खिलाफ पुलिस से अमानत में खयानत की शिकायत की। इसके बाद अहलावत भारत छोड़कर रूस चला गया। वहां जाने के बाद भी अहलावत ने मेरी कंपनी के खिलाफ झूठा प्रचार किया। बैंकों और सप्लायरों को इमेल और फोन कर झूठी जानकारी दी। जैसवानी ने आरोप लगाया कि उसने केस को आपसी संबंधों के कारण क्रिमिनल की जगह मीडिएशन पर लेने की अपील की। अहलावत ने सुप्रीम कोर्ट में गलत और भ्रामक जानकारी देकर 27 अक्टूबर तक की जमानत ले ली।

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