लुधियाना| सिख राज के अंतिम पलो तथा महाराजा दलीप सिंह की याद को समर्पित जगरांव तथा बरनाला इलाके के नौजवानों की ओर से विशेष प्रयत्न किए गए। लाहौर से आते हुए महाराजा दलीप सिंह 31 दिसंबर 1849 को इस इलाके से निकले थे तथा फिर वह कभी पंजाब नहीं आ सके। इन पलों को दोबारा ताजा करने के लिए पूर्व डीआईजी गुरप्रीत सिंह तूर की सरपरस्ती में गांव मल्ला, 5जैब स्पोर्ट्स अकादमी, माणुके लंमे जटपुरा, बस्सियां, जलालदीवाल, महल खुर्द तथा रायकोट के सहयोग से साइकिल रैली का आयोजन किया गया। इसी तरह बस्सियां इलाके के अलग-अलग गांव से शुरु हुई यह रैली महाराजा दलीप सिंह यादगारी कोठी में समाप्त हुई। बस्सियां कोठी में महाराजा दलीप सिंह के समूचे इतिहास के बारे में बताया। इस मौके पर गुरप्रीत सिंह तूर ने पंजाब के इतिहास मे 31 दिसंबर तथा बस्सियां कोठी की महत्ता बताते हुए कहा कि हमें इतिहास तथा विरसे को सदा याद रखना चाहिए। इसमें सरपंच गुरमेल सिंह, मास्टर अवतार सिंह चीमा, गुरप्रीत सिंह, डॉ. हरमिंदर सिंह जलालदीवाल, डायरेक्टर महिंदर सिंह आदि मौजूद रहे।


