जयपुर राज्य में किसानों को इस बार दोहरी राहत है। एक तो मानसून में अच्छी बारिश के चलते प्रदेश में भू-जल स्तर 6 मीटर बढ़ा है। दूसरा समय पर और अच्छी मावठ के चलते सिंचाई की पूर्ति हो रही है। इससे किसानों को अतिरिक्त सिंचाई नहीं देनी पड़ेगी, जिससे पानी और पैसे दोनों की बचत हो सकेगी। भू-जल विभाग की ओर से हाल ही जारी पोस्ट मानसून एसेसमेंट रिपोर्ट-2024 के अनुसार प्रदेश में पिछले मानसून के दौरान हुई असामान्य (अधिक) बारिश से ज्यादातर जिलों में भू-जल स्तर 6 मीटर तक बढ़ा है। पहले औसतन 28.83 मीटर पर भू-जल मिल रहा था, अब यह 23.01 मीटर पर मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 15 जिलों में अधिक और 8 जिलों में सामान्य बारिश दर्ज हुई थी। किसी भी जिले में सामान्य से कम या सूखा दर्ज नहीं हुआ। प्रदेश में सामान्य (417.46 एमएम) से 60% या इससे अधिक बारिश होने पर वह असामान्य श्रेणी में मानी जाती है। चूरू को छोड़ सभी जिलों में बढ़ा स्तर भू-जल विभाग की पोस्ट मानसून एसेसमेंट रिपोर्ट के अनुसार पिछले मानसून में बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर में भी सामान्य से 60% या अधिक बारिश हुई। जालोर में औसत से 20-59% ज्यादा हुई। यहां ग्राउंड वाटर लेवल 2.31 मीटर बढ़ा है। जैसलमेर में भूजल अब 49.79 के बजाय 47.29 मीटर पर मिल रहा है। इसी तरह बाड़मेर में भू-जल स्तर 1.73 मीटर, बीकानेर 0.81, जोधपुर1.51 मीटर बढ़ा है। एक जून से एक अक्टूबर के बीच सबसे ज्यादा 1931 एमएम बारिश करौली जिले में दर्ज हुई, जहां भू-जल स्तर 32.69 से बढ़कर 26.49 मीटर पर आया है। कुछ को छोड़कर ज्यादातर फसलों के लिए अमृत विशेषज्ञ राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान के सहायक प्रोफेसर डॉ. योगेश कुमार शर्मा ने बताया, प्रदेश में अभी हो रही मावठ फसलों के लिए अमृत की तरह है। चना, सरसों, तारामीरा सहित गेहूं, जौ जैसी फसलों में पानी की जरूरत कम करेगी। यानी किसानों को अतिरिक्त सिंचाई नहीं करनी पड़ेगी। इससे समय, धन और पानी तीनों की बचत होगी। यह मावठ फसलों की ग्रोथ के लिए भी अच्छी है। जो किसान बारिश पर ही निर्भर रहते हैं, उनके लिए तो यह वरदान है। इस बार भू-जल स्तर भी अच्छा है। यह किसानों, ग्रामीणों के लिए दोहरी राहत है। हालांकि प्याज सहित कुछ फसलों में नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक चूरू के अलावा सभी जिलों में भू-जल स्तर में वृद्धि हुई है। हालांकि चूरू जिले में भी बारिश सामान्य से अधिक दर्ज हुई, लेकिन भू-जल स्तर 0.19 मीटर कम हुआ है। सबसे ज्यादा 14 मीटर वृद्धि चित्तौड़गढ़ जिले में दर्ज हुई है। सवाईमाधोपुर जिले में 13.32 मीटर, बूंदी में 11.50, भीलवाड़ा में 10.89, डूंगरपुर में 9.96, प्रतापगढ़ में 9.96, अलवर में 9.87, बारां में 9, कोटा में 8.23, बांसवाड़ा में 6.68, जयपुर जिले में 4.70 मीटर वृद्धि दर्ज की गई है।


