सांघना सरपंच पर धर्मशाला के नाम पर 7 लाख के घोटाले का आरोप बीडीपीओ जांच से असंतुष्ट शिकायतकर्ता ने डीसी को भेजी शिकायत

शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर ब्लॉक अटारी के अधीन आते गांव सांघना के परगट सिंह ने सरपंच बलविंदर सिंह पर धर्मशाला बनवाने के नाम पर 7 लाख के घोटाले का आरोप लगाया है। आरोप है कि धर्मशाला बनवाने के लिए 2017 में एमपी लैंड से 7 लाख की ग्रांट जारी हुई थी, जिसे 2018 तक तैयार कराना था मगर बनवाया नहीं गया। जबकि खाते से पूरी रकम निकाल ली गई। ​ शिकायतकर्ता के मुताबिक, बीते अक्टूबर में डिस्ट्रिक डवलपमेंट पंचायत अफसर (डीडीपीओ) को धर्मशाला न बनाए जाने की शिकायत की थी। इसके बाद 10 ​दिसंबर को शिकायत की रिमाइंडर भेजी गई। डीडीपीओ ने मामले की इंक्वायरी संबंधित इलाके के बीडीपीओ को सौंप दी। बीडीपीओ ने जांच रिपोर्ट में लिखा कि 5 लाख से धर्मशाला और 2 लाख से रास्ता बनाया गया है। पंचायती राज एक्ट 1994 की धारा 216 की उपधारा 4 के अनुसार, 5 साल से अधिक का समय होने के कारण पड़ताल करना असंभव है। वहीं अब इस घोटाले की शिकायत डीसी को भेजी गई है ताकि मामले की जांच के बाद सच सामने आ सके। शिकायतकर्ता के मुताबिक, बीते 19 दिसंबर 2017 को सात लाख रुपए की ग्रांट चेक नंबर 014597 सरपंच को जारी किया गया था। हैरान करने वाली बात तो यह है कि ईंट-सीमेंट व अन्य सामग्री मंगवाने को लेकर अलग-अलग कंपनियों के नाम सरपंच की तरफ से चेक भी काटे गए हैं। 31 मई 2019 तक सात लाख की निकासी चलती रही। 3 साल में 24 हजार रुपए ब्याज भी बने थे जिसके 22 हजार रुपए निकाले जा चुके। वहीं अब खाते में सिर्फ 2 हजार रुपए बचे हुए हैं। जबकि नियम यह है कि यदि विकास कार्य नहीं कराया जा सका तो खाते में बची ग्रांट की जो भी रकम है, वापस हो जाती है। ऐसे में 5 सालों बाद ये दो हजार रुपए की रकम क्यों पड़ी हुई है। ^आरोप लगाने वाला परगट सिंह पहले पंचायत मेंबर था। गलत हरकतों की वजह से उसे हटा दिया था। इस बार वह चुनाव में हार गया, इसलिए इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगा रहा है। गांव में बाकायदा टीन शैड लगाकर चाहर दीवारी कराई है। विकास काम करवाया है, इसलिए दोबारा से लोगों ने सरपंच बनाया। 5 लाख रुपए धर्मशाला तो 2 लाख रुपए रास्ता बनवाने में ही खर्च किया गया है। -बलविंदर सिंह, सरपंच गांव सांघना एडवोकेट पीसी शर्मा ने बताया कि शिकायतकर्ता परगट सिंह ने एफिडेविट पर शिकायत उनके पास भेजी थी। जिसकी जांच कराने के लिए डीडीपीओ को लिखा था। मगर बीडीपीओ ने नियम का हवाला देकर रिपोर्ट भेज दी कि 5 साल बाद जांच करना असंभव है। नियम मुताबिक एमपी लैड से जारी ग्रांट के जरिए हुए विकास कामों का बोर्ड पर ब्योरा देना होता है। लेकिन गांव में कोई धर्मशाला नहीं बनाई गई है। मामले की शिकायत डीसी को भेजकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। विजलेंस, लोक सभा एमपी-लैड के डायरेक्टर जनरल व पीएमओ को भी शिकायत भेजेंगे। अफसरों ने धर्मशाला की परिभाषा ही बदल दी है। टीन शेड-चार दीवारी लगा बताया जा रहा कि धर्मशाला बनवा दी गई। एमपी लैंड की ग्रांट से यह बनाया गया इसका ब्योरा तक नहीं लिखा गया है। वहीं डीसी साक्षी साहनी ने बताया कि बीडीपीओ की जांच रिपोर्ट देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। ^एमपी लैंड से जारी ग्रांट से 5 लाख में धर्मशाला तो 2 लाख में रास्ता बनवाया गया है। शिकायतकर्ता से तालमेल करके मौका देखा गया, जहां दीवान हाल शेड, लंगर हाल शेड और धर्मशाला की चारदीवारी का काम हुआ है। धर्मशाला का जो काम कराया गया है 5 साल से अधिक होने के कारण पड़ताल असंभव है। करवाए गए काम का सर्टिफिकेट भी जारी हो चुका है। आस-पास के लोगों से पूछताछ करने पर बताया कि धर्मशाला बनवाया गया है। – विक्रमजीत सिंह, बीडीपीओ अटारी

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