बुढ़ापा बोझ नहीं, उत्सव है:100 से ज्यादा जिंदादिल बुजुर्गों का समूह, पिकनिक-ट्रीट के बीच हर सुख-दुख में साथ

सफर पीछे की जानिब है कदम आगे है मेरा, मैं बूढ़ा होता जाता हूं जवां होने की खातिर… ये पंक्तियां समाज के उन बुजुर्गों के लिए हैं जो जीवन के एक पड़ाव में कभी अकेलेपन से घिर जाते हैं। ऐसे पेंशनर्स के जीवन में आनंद के पल संजोने का काम कर रही है वरिष्ठ नागरिक समिति। इनके सदस्यों में किसी की बेटी कानपुर में प्राेफेसर है तो बेटा विदेश में इंजीनियर। इन्होंने अकेलापन दूर करने एक अलग आनंदमयी रास्ता निकाला है। हर महीने मिलन समाराेह कर अपनी नौकरी से जुड़े अनुभव साझा करते हैं। रचनाएं सुनाते हैं। पेंशनर्स अपने जन्मदिन पर ट्रीट (लंच) देते हैं। बाकी सदस्य बर्थ डे सॉन्ग गाते हैं। परिवार के साथ पिकनिक का आनंद लेते हैं। समिति के पास परिवार की सुरक्षा के लिए 20 हजार तक इमरजेंसी मेडिकल फंड रिजर्व है। इनकी अब अपने साथी सदस्यों की वर्क प्लेस की विजिट भी करने की तैयारी है। समिति में न कोई अध्यक्ष और न काेई उपाध्यक्ष वरिष्ठ नागरिक समिति दिसंबर 2022 में 8 लोगों की पहल से बनी। इसमें अलग-अलग विभागाें के 100 से ज्यादा पेंशनर्स हैं। समिति में न कोई अध्यक्ष है और न काेई उपाध्यक्ष। 10 लाेगों का संचालक मंडल है। 500 रुपए पहली बार मेंबरशिप चार्ज लेते हैं, जिससे मेडिकल फंड बनाया है। हर साल सभी इच्छानुसार सहयोग ​राशि देते हैं। आनंद की दाैड़.. जीवनसंगिनी भी आगे रविवार को वरिष्ठ नागरिक समिति के सदस्य हर्बल पार्क घाट पर घर की ​महिलाओं को पिकनिक पर लेकर आए। कुर्सी दाैड़ प्रतियोगिता हुई।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *