पद्मश्री हिम्मताराम बोले: कार्यक्रमों में बुलाने का आदेश केवल फाइलों में, प्रशासन शायद महत्व नहीं समझता

जिले को पर्यावरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला चुके पद्मश्री व पर्यावरण प्रेमी हिम्मताराम भांभू खुद के जिले में मान सम्मान नहीं पा रहे हैं। केंद्र सरकार ने जिला स्तरीय व सार्वजनिक कार्यक्रमों में पद्मश्री प्राप्त महानुभावों को अतिथि के रूप में आमंत्रित करने का आदेश दे रखा है, लेकिन केंद्र का यह आदेश केवल फाइलों में दबकर रह गए। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में 5 साल पहले पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त करने वाले हिम्मताराम भांबू को भले ही 14 राज्यों व 29 यूनिवर्सिटी में अतिथि के रूप में सम्मान दिया गया। वीआईपी प्रोटोकॉल दिया गया हो, लेकिन जिला स्तर पर 26 जनवरी व 15 अगस्त के कार्यक्रम के अलावा कोई मान सम्मान नहीं मिला, न ही ऐसा प्रोटोकॉल दिया गया। पद्मश्री का कद मंत्री, सांसद व विधायक से भी बड़ा माना जाता है, इसके बावजूद हिम्मताराम भांबू की सार्वजनिक आयोजनों में अनदेखी किसी चूक से कम नहीं मानी जा सकती। इसी पीड़ा को पद्मश्री भांबू ने दैनिक भास्कर के साथ साझा किए। पढ़िए उनसे बातचीत के अंश… पद्मश्री को अतिथि न बनाया जाना गंभीर है, केंद्र सरकार ने सम्मान दिया पर जिला स्तर पर नहीं, ऐसा क्यों ? प्रोटोकॉल और केंद्र सरकार के आदेशों के अनुसार तो सभी विभागों को यह आदेश मिला हुआ है। लेकिन स्थानीय प्रशासन नहीं बुलाए तो यह वो ही बता सकते है। बुलाए तो भी अच्छा और नहीं बुलाए तो भी प्रशासन की मर्जी। बाहर के राज्यों व विश्वविद्यालयों में होने वाले कार्यक्रमों में बुलाया जाता है। केंद्र का आदेश है कि पद्मश्री को जिला स्तरीय कार्यक्रमों में अतिथि बनाया जाए, क्या आपको बुलाते है? नहीं, मुझे जिला प्रशासन 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस), 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को स्टेडियम में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में ही बुलाते हैं। इसके अलावा आज तक किसी भी विभाग के बड़े कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया। शायद स्थानीय प्रशासन को इसके बारे में जानकारी नहीं होगी या फिर पद्मश्री का महत्व नहीं समझते होंगे। आप पर्यावरण क्षेत्र में पद्मश्री प्राप्त हैं, क्या वन विभाग भी न्यौता नहीं देता ? वन विभाग की तो स्थिति सबसे खराब है। यह खुद कभी पौधरोपण, पर्यावरण संरक्षण को लेकर कार्यक्रम भी नहीं करते हैं। हम खुद पौधे लगाते समय इनको बुलाते हैं, मगर उसमें भी कई बार नहीं पहुंच पाते हैं। फिर मुझे बुलाने का तो विचार ही नहीं आता होगा। स्थिति ऐसी है कि कई कार्यक्रमों में सरपंच को मुख्य अतिथि बनाया जाता है और मुझे विशिष्ट अतिथि बना दिया जाता है। ऐसा अधिकतर स्कूलों में होता है। जबकि सरपंच और पद्मश्री को लेकर स्कूल के अध्यापक भी प्रोटोकॉल नहीं समझते हैं। यह सम्मान बहुत बड़ा है। राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में बुलाते हैं: कलेक्टर कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने कहा कि पद्मश्री को राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में प्रमुखता से बुलाया जाता है। जिला स्तरीय व सामाजिक कार्यक्रमों में भी शामिल करने का नियम है तो देखकर ही बता सकता हूं। अगर ऐसा नियम व आदेश है तो सभी विभागों को इसके लिए निर्देशित किया जाएगा। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में पद्मश्री को बुलाया जाता है। वहीं, रिटायर्ड अधिकारियों को भी बुलाया जाता है। प्रशासन हमेशा सम्मान जारी रखेगा।

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