लोक संस्कृति के संग दिखे विकसित भारत के रंग:विशेषज्ञ बोले- सिंध के गौरवमयी इतिहास और परंपराओं को युवाओं तक पहुंचाना समय की आवश्यकता

कला, साहित्य, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की ओर से चल रहे ‘सांस्कृतिक सृजन पखवाड़ा’ के अंतर्गत राजस्थान सिंधी अकादमी एवं भारतीय सिंधु सभा राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को पाथेय भवन, मालवीय नगर, जयपुर में विकसित भारत के रंग-लोक संस्कृति के संग सिंधु सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान झूलेलाल और महात्मा गांधी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। मुख्य अतिथि जयपुर के पूर्व सांसद रामचरण बोहरा ने संबोधन में कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। इसमें आमजन की भागीदारी, भाईचारा और परस्पर सहयोग की भावना अहम भूमिका निभाएंगे। राजस्थान सिंधी अकादमी के पूर्व अध्यक्ष मोहनलाल वाधवाणी ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि सिंधु संस्कृति प्राचीन और वैभवशाली है। इस प्रकार के आयोजन नई पीढ़ी को मातृभाषा, कला और संस्कृति से जोड़ने में सहायक होते हैं। विशिष्ट अतिथि और भारतीय सिंधु सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार तीर्थाणी ने कहा कि युवाओं तक सिंध के गौरवमयी इतिहास और परंपराओं को पहुंचाना समय की आवश्यकता है। इसके लिए अकादमी और सभा को मिलकर कार्य करना होगा। कार्यक्रम में बच्चों और मातृशक्ति ने सिंधी गीत, संगीत और नृत्य की शानदार प्रस्तुतियां दीं। सिंधी लोकगीतों और नृत्य की प्रस्तुतियों ने ऐसा माहौल बनाया कि दर्शक भी अपनी सीटों से उठकर थिरकने लगे। इस मौके पर पूज्य सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष गिरधारी मनकाणी, समाजसेवी नारायण दास नाजवाणी, पूर्व पार्षद धर्मदास मोटवाणी समेत बड़ी संख्या में सिंधी समाज के गणमान्य लोग, साहित्यकार और पत्रकार मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन शोभा वसंन्दानी और हीरालाल तोलानी ने किया

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