विदिशा में विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष का उत्सव मनाया गया। इस दौरान रविवार को नगर की 8 बस्तियों में संचलन निकाले गए, जिनमें हजारों स्वयंसेवकों ने भाग लिया। संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी पर हुई थी, और इस वर्ष यह 100 वर्ष पूरे कर रहा है। गुरु गोविंद बस्ती का संचलन पुरानी गल्ला मंडी बरईपुरा से प्रारंभ होकर माधवगंज, बड़ा बाजार, बजरिया और रीठाफाटक होते हुए गल्ला मंडी पर समाप्त हुआ। इसमें 329 स्वयंसेवक शामिल हुए। इस अवसर पर अखिल भारतीय अधिकारी एवं आरोग्य भारती के राष्ट्रीय महासचिव अशोक वार्ष्णेय ने बौद्धिक दिया, जिसमें उन्होंने विजयादशमी को असत्य पर सत्य और अन्याय पर न्याय की विजय का प्रतीक बताया। संघ ने पांच परिवर्तन पर जोर दिया
रविदास बस्ती के संचलन में मुख्य वक्ता बृजकिशोर भार्गव ने संघ के पंच परिवर्तनों कुटुम्ब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, स्व का बोध, नागरिक कर्तव्य और पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया। बस्तीवासियों ने स्वयंसेवकों का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। महावीर बस्ती के संचलन में जिला कार्यवाह गुलाब सिंह कुशवाहा ने संघ के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी। जिला प्रचारक बोले- शाखाएं व्यक्ति और राष्ट्र निर्माण का आधार
नर्मदा बस्ती के पथ संचलन में स्वयंसेवकों का अनुशासन और राष्ट्रप्रेम स्पष्ट दिखा। जिला प्रचारक ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व गुरु रहा है और संघ की शाखाएं व्यक्ति व राष्ट्र निर्माण का आधार हैं। सरस्वती, सुदर्शन और यमुना बस्तियों में भी पथ संचलन आयोजित हुए, जहाँ संघ अधिकारियों ने समाज में समरसता और सेवा के भाव पर बल दिया। स्वयंसेवक ध्वज प्रणाम और शस्त्र पूजन के बाद दंड लेकर ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाते हुए आगे बढ़े। विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। माधवगंज चौराहे पर महिलाओं ने स्वयंसेवकों की आरती उतारी। संघ का शताब्दी वर्ष 2025 की विजयादशमी से 2026 की विजयादशमी तक मनाया जाएगा। विदिशा नगर की शेष 12 बस्तियों में पथ संचलन 5 और 12 अक्टूबर को आयोजित किए जाएंगे।


