संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने कहा कि भारत माता की जय बोलने से राष्ट्रभक्ति नहीं होती है। जीवन के हर पल, हर क्षण जब मैं समाज और देश के लिए कुछ करता हूं तो उसे राष्ट्रभक्ति कहते हैं। हर व्यक्ति को अपने मन में विचार करना चाहिए कि आज मैंने देश के लिए क्या किया, आज मैंने समाज को क्या दिया। दुर्भाग्य से सारा समाज मैं, मेरा परिवार, आत्मकेंद्रित, समाज से उदासीन, यही चारों तरफ का वातावरण दिखाई देता है। ईर्ष्या, द्वेष, गुटबाजी पता नहीं कब समाज के अंदर आ गई। उन्होंने कहा कि चार व्यक्ति मिलकर एक मंदिर बनाने का अच्छा काम शुरू करते हैं। दो ग्रुप हो जाते हैं, सब धार्मिक हैं, सब आस्थावान हैं, लेकिन आपस में लड़ते हैं। समाज के अंदर पता नहीं किस कालखंड मेंं आत्मविश्वास खत्म हो गया। अरुण कुमार आज गुरुवार को जयपुर के सीकर रोड स्थित हरमाड़ा नगर की हेडगेवार बस्ती में विजयादशमी उत्सव को संबोधित कर रहे थे। विदेशी शक्तियों ने भारत, हिंदू और संघ को मान लिया है कॉमन दुश्मन
सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने कहा कि आज हमारे समाज के अंदर बहुत सारी शक्तियां ऐसी हैं, जो इस समाज को बांटने का प्रयास कर रही हैं। जगह-जगह जातियों के आधार पर समाज को लड़ाने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश पर एक हजार साल या तो विदेशी शक्तियों का शासन था या उनके प्रभावों के आधार पर शासन चला। लेकिन पहली बार उन्हें लग रहा है कि हमारा अस्तित्व खतरे में है। यह समझकर उन्होंने अपनी रणनीति बदल ली है। सब एकत्र हो गए हैं और उन्होंने अपना एक कॉमन दुश्मन भारत, हिंदू और संघ को मान लिया है। संघ पर प्रश्न कैसे खड़े किए जाएं। इसके लिए सोशल मीडिया, मीडिया में आप देख रहे हैं कई प्रयास चल रहे हैं। महापुरुषों के नाम पर लड़ने लगते हैं लोग
संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने कहा कि समाज में जो शक्तियां देश को तोड़ना चाहती हैं। इस भारत को आगे बढ़ने से रोकना चाहती हैं। उसे हमें समझना होगा। हम महापुरुषों के नाम पर लड़ना शुरू कर देते हैं। आरक्षण के नाम पर समाज आमने-सामने खड़े जाते हैं। समाज के अंदर नॉन इश्यूज को लेकर बहुत बड़े-बड़े आंदोलन खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में समाज बांटने के प्रयास ओर बढ़ेंगे। इसके प्रति भी जागरूक रहना होगा।


