राजधानी में बीते चार दिन से कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। दिन में ठिठुरन गलन, सुबह-शाम घना कोहरा छाया रहता है। इसके बावजूद रात का पारा लुढ़कने की बजाय सामान्य से ज्यादा बना हुआ है। स्थिति यह है कि इस बार दिसंबर में रात का पारा बीते 6 साल में सबसे ज्यादा रहा। 2018 से 2023 तक दिसंबर में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री से नीचे गया था। इससे पहले 2022 में जरूर 6.2 डिग्री रहा था। लेकिन, इस बार तापमान केवल एक बार 6.8 डिग्री सेल्सियस तक ही नीचे गया। दिसंबर के अंतिम 10 दिनों में रात का तापमान 8 बार सामान्य की तुलना में 4 से 5 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया है। मावठ के बावजूद चार दिन पहले पारा 7 से 8 डिग्री तक ही गिरा। मौसम विशेषज्ञ एवं भोपाल मौसम विभाग के पूर्व निदेशक डीपी दुबे ने बताया कि दिसंबर में बीते वर्षों की तुलना में कम सर्दी पड़ी है। रात का पारा भी सामान्य से ज्यादा रहा। इसके पीछे बड़ा कारण यह रहा है कि पूरे माह में औसत की तुलना में पश्चिमी विक्षोभ सिस्टम कम बने हैं। इसके साथ ही एंटी साइक्लोन सिस्टम एक्टिव होने से उत्तर से आने वाली ठंडी हवाओं का असर भी कम हुआ। जबकि, इनकी फ्रिक्वेंसी ज्यादा थी। हाल में एक पश्चिमी विक्षोभ सिस्टम के बाद ओले-बारिश हुई लेकिन जयपुर से ग्वालियर के बीच एक एंटी साइक्लोन एक्टिव है जो ठंडी हवाओं को रोक रहा है। इससे कोल्ड विंड का प्रभाव कम रहा और रात के तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं हो पाई। आगे क्या: 3-4 दिन घना कोहरा, गलन रहेगी बीते साल फतेहपुर, जोबनेर, माउंट आबू में लगातार एक हफ्ते तक पारा माइनस में दर्ज किया गया था। लेकिन, इस बार फतेहपुर और माउंट आबू में पारा ज्यादा दिन जमाव बिंदु से नीचे नहीं गया। बीती रात माउंट आबू 2.2 डिग्री के साथ सबसे ठंडा शहर रहा। इसके अलावा सिरोही 3.8, फतेहपुर 4.8, श्रीगंगानगर 4.6, बीकानेर 5.2, अजमेर 4.9 डिग्री के साथ सबसे सर्द शहर रहे। आगे तीन-चार दिन घने कोहरे के साथ दिन में गलन रहने के आसार हैं। दिसंबर में 16 डिग्री का रिकॉर्ड इस बार दिसंबर में न्यूनतम तापमान सबसे कम 13 दिसंबर को 6.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। दिसंबर के आखिरी दस दिन में से आठ दिन न्यूनतम तापमान 12 से 16 डिग्री के बीच रहा है, यह औसत सामान्य तापमान से 5 से 6 डिग्री ज्यादा है। केवल बीती दो रात से पारा 7 से 8 डिग्री के बीच रहा है। जबकि, 2019 में दिसंबर में पारा 1.0 डिग्री तक गया था। नवंबर में भी पारा सामान्य से ज्यादा था जयपुर मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इस बार मानसून के बाद पश्चिमी विक्षोभ सिस्टम कम रहे, इससे बारिश नहीं हुई। इससे नवंबर में भी पारा सामान्य से ज्यादा दर्ज हुआ था। दिसंबर के शुरुआती तीन हफ्ते भी ऐसे ही गुजरे। प्रदेश में तापमान पश्चिमी विक्षोभ और उत्तरी हवाओं के प्रभाव से कम-ज्यादा होता है। पश्चिमी विक्षोभ सिस्टम के बाद मावठ होने से ठंड बढ़ती है और दिन-रात के तापमान पर असर पड़ता है। इस बार पहाड़ी इलाकों में भी देरी से बर्फबारी हुई और उत्तरी हवाओं का प्रभाव कम रहा। ऐसे में रात का पारा ज्यादा नहीं लुढ़का। आगे एक हल्का पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है लेकिन तीन-चार दिन घना कोहरा और गलन रहने के आसार हैं।खेत में खिले बर्फ के फूल


