जोधपुर के मथुरादास माथुर हॉस्पिटल में 17 करोड़ की लागत प्रदेश की पहली हीलियम फ्री एमआरआई (MRI) मशीन को लगाया जाएगा। दावा है कि इस मशीन में MRI करवाने के दौरान मरीज को घुटन महसूस नहीं होगी। पूरी तरह से डिजिटल मोड पर संचालित मशीन से हर दिन करीब 100 MRI हो सकेगी। यह नॉर्थ इंडिया की पहली ऐसी मशीन है जो हीलियम फ्री है। इस मशीन को नॉर्थ इंडिया की पहली और देश की तीसरी बड़ी मशीन बताया जा रहा है। इसका उद्घाटन 2 जनवरी को किया जाएगा। ये मशीन महज 20 से 25 मिनट में टेस्ट कर मरीज को फ्री कर देगी। इसे MDM हॉस्पिटल में नवनिर्मित डायग्नोस्टिक विंग में लगाया गया है। वर्तमान में यहां पर 45 से 50 MRI रोजाना की जाती है। MRI को लेकर वेंटिंग होगी खत्म एमडीएम हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर नवीन किशोरिया ने बताया- इस मशीन के बाद हॉस्पिटल में MRI को लेकर चल रही वेटिंग भी खत्म होगी। इसके साथ ही मरीज को जांच रिपोर्ट भी जल्द मिल पाएगी। ये मशीन महज 25 मिनट में एक MRI कर सकेगी। इस मशीन का संचालन हॉस्पिटल का रेडियो डायग्नोस्टिक विभाग करेगा। बता दे कि मथुरादास माथुर हॉस्पिटल और महात्मा गांधी हॉस्पिटल दोनों में MRI को लेकर वेटिंग है। अकेले एमडीएम हॉस्पिटल की बात की जाए तो करीब 50 MRI जांच हर दिन की जाती है। इसके लिए 15 से 20 दिन की वेटिंग है। हर दिन होगी 100 MRI फिलिप्स कंपनी की इस मशीन को नॉर्थ इंडिया की पहली ओर देश की तीसरी बड़ी मशीन बताया जा रहा है। दावा है कि इस मशीन में MRI करवाने के दौरान मरीज को घुटन महसूस नहीं होगी। पूरी तरह से डिजिटल मोड पर यह मशीन संचालित होगी। इसमें प्रति सेकंड 60 हजार इमेज कंसोल यानी रिकॉर्डिंग रूम में प्राप्त हो सकेगी जबकि अन्य मशीनों की बात की जाए तो उनमें 15 से 20 हजार इमेज रिकॉर्ड रूम में पहुंचती है। यह मशीन नाकोड़ा ट्रस्ट की ओर से करीब 17 करोड़ की लागत से लगवाई जा रही है। दावा है कि ये की मशीन रोजाना करीब 100 MRI कर सकेगी। वर्तमान में यहां पर 45 से 50 MRI रोजाना की जाती है। हीलियम फ्री मशीन से अतिरिक्त खर्च बचेगा यह मशीन हीलियम फ्री है। आमतौर पर हॉस्पिटल में हीलियम उड़ने जैसी घटना होती है लेकिन इस मशीन के साथ ऐसा नहीं होगा। एक मशीन में 1500 से 1800 लीटर के करीब हीलियम होता है, जिसकी वजह से मशीन ठंडी रहती है। इस मशीन में महज 7 लीटर हीलियम ही रहेगा। अन्य मशीनों में हीलियम खत्म होने पर करीब 50 लाख रुपए तक का खर्चा आता है। ऐसे में इस मशीन के आने के बाद एमडीएम हॉस्पिटल का अतिरिक्त खर्च भी बचेगा। इसे प्रकृति के हिसाब से भी अनुकूल बताया जा रहा है। वर्तमान में जोधपुर के मथुरादास माथुर हॉस्पिटल में करीब 5 से 7 हजार की ओपीडी रहती है। यहां पर जोधपुर संभाग के बाड़मेर, जैसलमेर, फलौदी, बालोतरा सहित पाली, जालोर, सिरोही से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं। हॉस्पिटल में इसके चलते एम्स से कई गुना अधिक भीड़ रहती है। डायग्नोस्टिक विंग जल्द होगी शुरू हॉस्पिटल में वर्तमान में डायग्नोस्टिक विंग का काम हो चुका हैं, जिसे जल्द शुरू किया जाएगा। इसके शुरू होने के बाद मरीजों को एक ही जगहों पर जांच से लेकर रिपोर्ट मिल सकेगी। वर्तमान में मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए सेंट्रल लैब तक जाना होता हैं। इस विंग के शुरू होने के बाद जांच से लेकर रिपोर्ट भी मिल सकेगी। 5 मंजिला इस बिल्डिंग के बेसमेंट में सैंपल कलेक्शन रूम, एफएनसी रूम, रिसर्च लैब, ब्लड डोनेशन कक्ष और डॉक्टर ड्यूटी कक्ष बनाए गए हैं। ग्राउंड फ्लोर पर स्वागत कक्ष, रिपोर्ट डिस्पैच कक्ष, सैंपल कलेक्शन रूम, ब्लड डोनेशन, रूम जांच लैब और अल्ट्रासाउंड रूम बनाए गए हैं। वहीं फर्स्ट फ्लोर पर सीरोलॉजी लैब, सेंट्रल स्टोर रूम, सेमिनार कक्ष आदि बनाए गए हैं। सेकेंड फ्लोर पर इमरजेंसी लैब, लेबोरेटरी कक्ष के अलावा डॉक्टरों के रूम है।


