मेवाड़ की ऐतिहासिक राजसमंद झील इन दिनों खुद एक गीत, गजल और कहानी बन गई है। क्योंकि, यहां हर किसी की जुबान पर इसी का राग है। हो भी क्यों न, सालों में कभी कभार छलकने वाली ये झील पिछले तीन साल में दूसरी बार छलकी है। 30 फीट भराव क्षमता को पार कर चुकी यह झील महा-उत्सव मना रही है और जनता जल उत्सव। यह 68 साल में महज 5वां ऐसा मौका है। इसे निहारने के लिए रोज उदयपुर समेत आसपास के क्षत्रों से लोगों को हुजूम है। द्वितीय विश्वयुद्ध में सीप्लेन का बेस बन गई थी राजसमंद झील
राजसमंद झील का निर्माण महाराणा राज सिंह प्रथम ने कराया था। उस समय इस काम पर 1.50 करोड़ की लागत आई थी। द्वितीय विश्व युद्ध ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स ने इस झील का उपयोग सैन्य जल-विमान (सीप्लेन) बेस के रूप में किया था।


