पंचायतीराज में सबसे अधिक शिकायतें फर्जी जॉब कार्ड और हाजिरी की आती है। इन गड़बड़ियों को रोकने के लिए राज्य सरकार मनरेगा से जुड़े 80 लाख से अधिक श्रमिक परिवारों की ई-केवाईसी कराएगी। इसके साथ ही हर श्रमिक का एआई फेस ऑथेंटिकेशन से सत्यापन भी मोबाइल के माध्यम से होगा। हालांकि, यह सत्यापन संबंधित पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी ही कर पाएंगे। सरकार ने इस प्रक्रिया की शुरुआत कोटा से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शामिल करते हुए की। जिला परिषद के सीईओ कमल मीना ने बताया कि यहां के बाद प्रदेश में इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा। बिना ई-केवाईसी से कोई श्रमिक काम नहीं कर पाएगा न भुगतान होगा। वह सब कुछ जो आपको जानना जरूरी यह फायदा होगा… कोटा जिले में करीब 1 लाख 92 हजार 116 परिवारों की ई-केवाईसी होनी है। यह प्रक्रिया सभी ब्लॉक में शुरू कर दी। प्रक्रिया डुप्लिकेट श्रमिकों के नाम स्वत: ही हट जाएंगे। साथ ही फर्जी नामों से भी राहत मिलेगी। क्योंकि, कई बार ये होता था श्रमिक की जगह अन्य फोटो अपलोड कर दिया जाता था। एक श्रमिक का बहुत सी बार फोटो अपलोड कर देते थे। फर्जी तरीके से भुगतान उठा लेते थे। ऐसे कई गबन के मामले सामने आएं थे। इसके अलावा लाखों जॉब कार्ड बंद पड़े है।


