अफसरों की दिवाली:महंगे गिफ्ट कहां से आए- ये बताना नहीं होगा

इस बार सरकारी चपरासी से लेकर अफसरों तक की दीपावली खास होगी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर क्लास वन अफसरों तक की दिवाली इस बार और भी खास होने वाली है। मप्र सरकार 60 साल पुराने अपने सिविल सेवा आचरण नियम को बदलने जा रही है, जिसके बाद चपरासी से लेकर अफसर किसी भी एक व्यक्ति से महंगा गिफ्ट ले सकेंगे। घर में यदि कोई वे सामान खरीदते हैं तो इसकी भी जानकारी उन्हें सरकार को नहीं देनी पड़ेगी। आचरण नियमों के सख्त प्रावधानों को कुछ सरल करने की शासन स्तर पर आमराय बन गई है। उच्च स्तर पर इसे लेकर तीन दौर की चर्चा भी हो गई है। ड्राफ्ट भी तैयार है। कोशिश है कि इसे दिवाली से पहले कैबिनेट की मंजूरी मिल जाए। साथ ही इसे नोटिफाई कर दिया जाए। इसके बाद 1965 के आचरण नियम 2025 के संशोधित आचरण नियमों में बदल जाएंगे। शासन का तर्क है कि आचरण नियमों में इस बदलाव से अनावश्यक कागजी कार्रवाई बंद होगी। क्योंकि उपहार समेत कुछ अन्य कार्य को करने के बाद एक माह के भीतर इसकी जानकारी सरकार को देना अनिवार्य है। संशोधन के बाद यह बाध्यता नहीं रहेगी। बाकी प्रावधानों को बरकरार रखा जा रहा है। गिफ्ट लेने के 3 विकल्प… 10 दिन, 15 दिन या एक महीने के वेतन के बराबर बाहर से गिफ्ट ले सकेंगे, इनमें से किसी एक को मंजूरी खरीदी छुट्टी ​​​​​​​​​​​​​​ड्यूटी पर रील बनाई तो कार्रवाई, सोसायटी में सदस्य बन सकेंगे अब परिवार के बारे जानकारी देने में छूट अभी यह नियम है कि सरकारी कर्मचारी या अधिकारी के परिवार से जुड़े किसी व्यक्ति की प्राइवेट संस्था या कंपनी में नौकरी लगी है तो उसकी जानकारी सरकार को देनी होगी। नए संशोधन के बाद यह प्रावधान खत्म कर दिया जाएगा।

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