अशोकनगर में दशहरे पर जिले के 24 वर्षीय पीयूष जैन ने सांसारिक जीवन को त्याग कर ब्रह्मचर्य दीक्षा ली और वैराग्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। यह दीक्षा उन्होंने सुभाषगंज में आयोजित मुनिश्री सुधा सागर जी महाराज के जिज्ञासा समाधान कार्यक्रम के दौरान ली। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी हजारों लोग बने। 54 लाख के सालाना पैकेज को कहा अलविदा पीयूष जैन पुणे की एक प्रतिष्ठित आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे, जहां उनका वार्षिक पैकेज 54 लाख रुपए था। बावजूद इसके, उन्होंने सांसारिक मोह-माया को त्यागकर श्रमण जीवन को चुना। अब वे आत्मकल्याण और मोक्ष की राह पर चलने वाले साधक बन गए हैं। मां ने तय कर दी थी शादी, बेटे ने चुना वैराग्य पीयूष के माता-पिता संजीव जैन और सीमा जैन इस क्षण के गवाह बने। उनकी मां ने बेटे की शादी के लिए लड़की भी तय कर ली थी। लेकिन पीयूष ने उन्हें फोन कर कहा—”अब मैं आपके सामने एक दूल्हे के रूप में नहीं, बल्कि श्रमण जीवन के पथिक के रूप में आऊंगा।” यह सुनकर परिवार की आंखें नम हो गईं, लेकिन उन्होंने बेटे के फैसले का सम्मान करते हुए उसे आशीर्वाद दिया। वैराग्य को बताया तलवार की धार पर चलना मुनि पुंगव सुधा सागर जी महाराज ने बताया कि उन्होंने पीयूष को वैराग्य मार्ग की कठिनाइयों से अवगत कराया था। उन्होंने इसे तलवार की धार पर चलने जैसा कठिन बताया, लेकिन पीयूष अपने निर्णय पर अडिग रहे। मुनिश्री ने कहा, “जब संसार के बंधन ढीले पड़ते हैं, तभी आत्मा मोक्ष के मार्ग पर बढ़ती है।” समाज के लिए गौरव का क्षण मुनिश्री सुधा सागर जी ने कहा कि दशहरे जैसे शुभ दिन पर पीयूष द्वारा लिया गया यह निर्णय केवल उनका व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत और गौरव का विषय है। हजारों लोगों ने देखा वैराग्य का दुर्लभ क्षण दीक्षा कार्यक्रम के दौरान विशाल पंडाल में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस अलौकिक पल को अनुभव किया, जब एक युवा ने वैभवशाली जीवन छोड़कर त्याग, तप और साधना का मार्ग अपनाया।


