बुरहानपुर में विजयादशमी पर गुरुवार शाम को भगवान बालाजी महाराज की पारंपरिक और भव्य रथयात्रा निकाली गई। भक्तों में इस दौरान गजब का उत्साह देखने को मिला। रथ पर भगवान बालाजी सात मुखं वाले घोड़े के प्रतीकात्मक वाहन पर सवार थे। साल में सिर्फ एक बार निकलता है रथ यह ऐतिहासिक रथ वर्ष में केवल दशहरे के दिन ही निकाला जाता है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्सुकता रहती है। रथयात्रा शाम 6 बजे बालाजी मंदिर से शुरू हुई और पाण्डुमल चौराहा, गांधी चौक, फव्वारा चौक से होती हुई शनि मंदिर तक पहुंची। शमी पूजन के साथ हुई धार्मिक परंपराएं शनि मंदिर के पास एक श्रद्धालु के निवास स्थान पर भगवान बालाजी की प्रतिमा को रथ से उतारा गया, जहां दशहरे के विशेष धार्मिक महत्व वाले शमी वृक्ष का पूजन किया गया। शमी पूजन के बाद यात्रा वापस पाण्डुमल चौराहा होते हुए बालाजी मंदिर लौटी। पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने “जय बालाजी”, “जय गोविंदा” के जयघोष लगाए, जिससे माहौल भक्तिमय हो गया। पुलिस व्यवस्था रही चाक-चौबंद भारी भीड़ और रथयात्रा को देखते हुए सुरक्षा के लिए पुलिस बल की विशेष तैनाती की गई थी। पूरे मार्ग पर प्रशासन ने निगरानी रखी ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। 3 अक्टूबर से लगेगा मेला, नदी का जल स्तर रहेगा तय रथयात्रा के बाद अब 3 अक्टूबर, शुक्रवार से सतियारा घाट पर पारंपरिक मेले का आयोजन प्रस्तावित है। हालांकि, ताप्ती नदी का जल स्तर सामान्य रहने पर ही मेला घाट पर लगेगा। यदि पानी अधिक हुआ, तो आयोजन बालाजी मंदिर परिसर में ही किया जाएगा। यह मेला 3 अक्टूबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर तक चलेगा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु व ग्रामीण इसमें शामिल होंगे।


