बाहरवीं पास ने बनाया गिरोह, चला दिए लाखों के नकली:ठगों का फैला था चंडीगढ़ से हिमाचल, पंजाब ,राजस्थान और जम्मू कशमीर तक काला कारोबार

चंडीगढ़ की क्राइम ब्रांच टीम ने ठगों के गिरोह का पर्दाफाश किया है, वह देश के पांच राज्यों में नकली नोट चलाने का काला कारोबार कर रहे थे। राजस्थान, जिला झालावाड़ के गांव झालरापाटन में किराये के मकान में इसके लिए छापाखाना चलाया जा रहा था। पुलिस की तरफ से तीन आरोपितों को काबू किया है, यह तीनों बाहरवीं पास हैं, शेयर मार्केट में घाटा पड़ने के बाद आरोपितों ने नोट बनाने और इन्हें चलाने का काला कारोबार शुरू कर दिया। वह कुरियर के जरिए नोटों को इधर से उधर करते थे। नोट चलाने के लिए खरीददारों और ग्राहकों की तलाश इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म इंस्टाग्राम, फेसबुक और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल होता था। इन प्लेटफार्म के माध्यम से वह लाख रुपए नकली नोट के बदले में 1 लाख रुपए लेते थे। खरीदने वाला व्यक्ति इसे या तो महंगे दाम में नकली नोट बेच देता था या फिर असली नोटों के बीच में नकली नोट डालकर इन्हें चला दिया जाता था। यह सभी कुछ समय में ही अमीर बन गए थे और इनके पास से कई गाड़ियां बरामद हुई हैं। पुलिस को आशंका है कि यह लोग अब तक कई करोड़ रुपए के नकली नोट चला चुके हैं। इस समय वह दीवाली को नजदीक देखकर ज्यादा से नकली पैसे चलाने की फिराक में थे। पुलिस ने आरोपियों से 500 व 100 के 7,157 जाली नोट, जिनकी कुल राशि 24,27,700 बनती है जब्त किए हैं। फर्जी मुद्रा में असली नोटों के जटिल सुरक्षा फीचर्स नहीं थे जो सावधानी से निरीक्षण करने पर ही पहचाने जा सकते हैं। जाली नोटों के अलावा दो गाडियां, प्रिंटर, स्याही, कटर और सुरक्षा धागा लगे कागज भी बरामद किए गए। इस सिंडिकेट की गतिविधियों का दायरा चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर तक फैला हुआ था। केंद्रीय एजेंसियों की इनपुट पर हाथ आए आरोपित यहां जानकारी देते हुए क्राइम ब्रांच के एसपी जसबीर सिंह ने बताया कि केंद्रीय एजेंसियों के इनपुट पर पुलिस टीम ने शिशु निकेतन स्कूल सेक्टर 22 चंडीगढ़ के पास ट्रेप लगाया हुआ था। पुलिस के मुखबिर द्वारा पहचान करने पर वहां से गौरव कुमार और विक्रम मीणा नामक आरोपियों को 500 रुपए के फर्जी नोट चलाते हुए काबू किया गया। तलाशी के दौरान काले रंग के बैग से 500 के 19 नकली नोट बरामद हुए, इसके बाद उसकी सिल्वर रंग की टाटा हैरियर की तलाशी में 500 के 1,626 फर्जी नोट मिले। साथ ही, विक्रम मीणा की अल्टो कार से 500 के 392 फर्जी नोट बरामद हुए। विक्रम मीणा संगरूर में डीटीडीसी को कुरियर एजेंट हैं और वहां दाना मंडी में गौशाला रोड पर उसकी दुकान से 500 के 10 फर्जी नोट और 100 के कुछ नोट बरामद किए गए। जांच में पता चला कि यह नोट कुरियर के माध्यम से राजस्थान के गांव झालावाड़, राजस्थान से एक कोरियर के जरिए प्राप्त हुई थी और यह नोट उसे हिमाचल प्रदेश के गांव कटिपरी थानर पधर के निवासी आरोपी गौरव कुमार के कहने पर यहां भेजे गए थे। पुलिस ने उसके पास से भी 4 पैकेटों में 400 नकली 500 रुपए के नोट बरामद किए हैं। दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने राजस्थान में छापेमारी की और आरोपी जितेंद्र शर्मा को झालरापाटन, जिला झालावाड़, राजस्थान से गिरफ्तार किया गया। उसके किराए के मकान से 12,20,700 रुपये मूल्य के नकली नोट बरामद हुए। साथ ही प्रिंटर, बॉन्ड पेपर जिनमें “RBI भारत” सुरक्षा धागा लगा था और नकली करेंसी छापने में उपयोग होने वाली अन्य वस्तुएं भी मिलीं। किसने छिपा रखे थे कितने रुपए इंटरनेट मीडिया के जरिए होती थी ग्राहकों की तलाश शुरुआत में वे नकली भारतीय करेंसी नोट की डिलीवरी लेने के लिए व्यक्तिगत रूप से मिलते थे और फिर इन्हें जाने-पहचाने ग्राहकों को सप्लाई कर देते थे। बाद में, उन्होंने फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करना शुरू किया ताकि संभावित खरीदारों को वीडियो व तस्वीरें दिखाकर और लाभ बताकर फंसाया जा सके। संपर्क और भरोसा बनने के बाद, पहले छोटे-छोटे नमूने भेजे जाते थे, उसके बाद बड़े पैकेट के रूप में डिलीवरी दी जाती थी। एक लाख असल में बेचे जाते थे तीन लाख रुपए वे नकली भारतीय नोट आमतौर पर 1/3 के अनुपात में बदले जाते थे; यानी 3 लाख रुपये के नकली नोट 1 लाख रुपये असली करेंसी में बदले जाते थे। हालांकि, यह अनुपात तय नहीं था और आपसी सहमति व मोलभाव पर आधारित होता था। पकड़े नहीं जाएं इस लिए वह खरीदार या ग्राहक इन नोटों को या तो कम अनुपात पर दोबारा बेचकर मुनाफा कमाते थे या फिर इन्हें असली नोटों की गड्डियों में मिलाकर पहचान से बचते थे, जिससे नकली करेंसी सार्वजनिक रूप से प्रचलन में आ जाती थी। बाहरवी पास ने बनाया गिरोह और चला दिए लाखों के नकली नोट गौरव कुमार- निवासी: कटिपरी, जिला मंडी, हिमाचल प्रदेश आयु: 34 वर्ष शैक्षिक योग्यता: 12वीं पास व्यवसाय: शेयर बाजार गौरव कुमार ने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी ताकि अपने खेल संबंधी सपनों को पूरा कर सके, लेकिन वह असफल रहा। इसके बाद उसने शेयर बाजार में निवेश करना शुरू किया, जहाँ उसे वायदा, ऑप्शन ट्रेडिंग और कमोडिटी मार्केट में भारी नुकसान हुआ। अपने नेटवर्क के माध्यम से उसकी मुलाकात गोंदिया (महाराष्ट्र) के प्रमोद काटरे और संगरूर (पंजाब) के विक्रम मीणा से हुई, जो नकली करेंसी के धंधे में शामिल थे। नकली नोटों का सैंपल मिलने के बाद उसने इन नोटों को खरीदना शुरू किया और फिर इन्हें या तो अपने परिचित खरीदारों को या सोशल मीडिया के जरिए मिले ग्राहकों को सप्लाई करना शुरू किया। विक्रम मीणा उर्फ विक्की निवासी: 247 पटियाला गेट, संगरूर, पंजाब आयु: 35 वर्ष शैक्षिक योग्यता: 12वीं पास व्यवसाय: शेयर बाजार विक्रम मीणा ने शेयर बाजार में निवेश किया लेकिन उसे घाटा हुआ। जल्दी पैसा कमाने के लिए उसने अपने संपर्कों से नकली करेंसी की सप्लाई तलाशनी शुरू की। इस दौरान उसकी मुलाकात गोंदिया (महाराष्ट्र) के प्रमोद काटरे, मंडी (हि.प्र.) के गौरव उर्फ रंजीत और कोटा के जितेंद्र शर्मा से हुई। इसके बाद उसने नकली नोट खरीदना और अन्य खरीदारों को सप्लाई करना शुरू किया। वह नकली करेंसी असली पैसे के बदले लेता और फिर नोट प्राप्त करने के बाद उन्हें आगे अन्य ग्राहकों तक पहुंचाता और वितरित करता था। जितेंद्र शर्मा हरीओम शर्मा निवासी: मकान नंबर C-129A, चंद्रावती ग्रोथ सेंटर रेजिडेंशियल, झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान स्थायी पता: मकान नंबर C-1/9, महानंदा नगर, देवास रोड, उज्जैन, ओम गार्डन, मध्यप्रदेश आयु: 42 वर्ष शैक्षिक योग्यता: 12वीं पास पढ़ाई के बाद, जितेंद्र शर्मा ने पहले उज्जैन में एक मोबाइल शॉप चलाई और बाद में वहां एक डिस्पोजेबल पेपर कप यूनिट स्थापित की, लेकिन नुकसान झेलना पड़ा। इसके बाद वह झालावाड़ चले गए, जहाँ उनके माता-पिता और भाई किराना दुकान चलाते थे। उन्होंने अपनी स्विफ्ट कार से टैक्सी सेवा शुरू की, लेकिन बैंकों से लिए गए भारी कर्ज की ईएमआई चुकाने का दबाव उन पर था। जल्दी पैसा कमाने के तरीकों की तलाश में, उनका संपर्क गोंदिया (महाराष्ट्र) के प्रमोद काटरे और संगरूर (पंजाब) के विक्रम मीणा से हुआ। प्रमोद काटरे और दिल्ली से अन्य सप्लायरों से FICN (नकली भारतीय मुद्रा) की खेप मिलने के बाद, उन्होंने इन्हें विक्रम मीणा और अन्य खरीदारों को सप्लाई किया। बाद में उन्होंने अपना प्रिंटिंग ऑपरेशन शुरू करने का फैसला किया और सुरक्षा धागे वाले कागज़, कटर, स्याही आदि आवश्यक उपकरण जुटाए।

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