तीर्थ पुरोहित महासंघ, धर्म यात्रा महासंघ और विश्व हिंदू परिषद के संयोजन में 5 से 9 अक्टूबर तक श्री कृष्ण गुरुकुल शिक्षा यात्रा मथुरा से उज्जैन तक निकाली जाएगी। यह यात्रा 9 अक्टूबर को उज्जैन के सांदीपनि आश्रम पहुंचेगी, जहां धर्म सभा के बाद श्री महाकालेश्वर मंदिर पर इसका समापन होगा। यात्रा संयोजक सुरेंद्र चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में 11 वर्ष 7 दिन की आयु में कंस का वध करने के बाद अपनी शिक्षा के लिए मथुरा से उज्जैन की यात्रा की थी। यह यात्रा उसी ऐतिहासिक मार्ग का अनुसरण करेगी, जो मथुरा से जयपुर, कोटा, झालावाड़, रणथंभौर और आगर होते हुए उज्जैन आता है। यात्रा का शुभारंभ 4 अक्टूबर को मां यमुना मैया की आरती और पूजन के बाद होगा। रथ पर भगवान कृष्ण और बलराम की मूर्तियां विराजित रहेंगी। यह यात्रा 5 अक्टूबर को जयपुर, 7 अक्टूबर को कोटा और झालावाड़ पहुंचेगी। 8 अक्टूबर को यह मध्य प्रदेश के आगर में प्रवेश करेगी। सभी पड़ाव स्थानों पर धर्म सभाएं आयोजित की जाएंगी। 9 अक्टूबर को यात्रा सुबह 9 बजे उज्जैन में प्रवेश करेगी और महर्षि सांदीपनि आश्रम पहुंचेगी। यहां मुख्यमंत्री मोहन यादव यात्रा का स्वागत और अगवानी करेंगे। आश्रम में एक धर्म सभा होगी, जिसे मुख्यमंत्री सहित संत महात्मा संबोधित करेंगे। इसके बाद यात्रा महाकालेश्वर मंदिर पहुंचकर संपन्न होगी। चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान कृष्ण ने अपनी शिक्षा यात्रा के दौरान 4 दिन में 4 वेद, 6 दिन में 6 शास्त्र, 16 दिन में 16 विद्या, 18 दिन में 18 पुराण और 64 दिन में 64 कलाएं, कुल 108 ज्ञान प्राप्त किए थे। इन्हीं 108 शिक्षाओं के प्रतीक स्वरूप इस यात्रा में 108 यात्रियों का चयन किया गया है। सभी यात्री अपने निजी फोर-व्हीलर वाहनों से यात्रा में शामिल होंगे। आयोजन समिति की ओर से यात्रियों के लिए 5 दिन की यात्रा के दौरान स्वल्पाहार, चाय, नाश्ता, भोजन और विश्राम की व्यवस्था निःशुल्क रहेगी।


