नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने आज मुरैना सोलर पार्क के संबंध में मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि मुरैना में विकसित हो रही प्रदेश की पहली सोलर-प्लस-स्टोरेज परियोजना में 2.70 रुपए प्रति यूनिट की टैरिफ मिली है। यह देश की पहली परियोजना है जिसमें 3 रुपए प्रति यूनिट से कम पर फर्म और डिस्पोजेबल रिन्युएबल एनर्जी उपलब्ध होगी। यह परियोजना 95 प्रतिशत वार्षिक उपलब्धता के साथ भारत की पहली सोलर-प्लस-स्टोरेज परियोजना बन गई है। अब तक देशभर की परियोजनाओं में केवल 50% पीक ऑवर्स उपलब्धता और 85% वार्षिक उपलब्धता हो पाती थी। मुरैना परियोजना इस ट्रेंड को बदलते हुए पीक ऑवर्स में 95% आपूर्ति के नए मानक स्थापित करेगी। राजधानी के एक होटल में पत्रकारों से चर्चा में शुक्ला ने कहा कि मुरैना सोलर पार्क को रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड द्वारा क्रियान्वित किया गया है जिसने पहले भी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित किया है। मुरैना परियोजना से जनरेट बिजली राज्य द्वारा खरीदी जाएगी। मुरैना सोलर पार्क में 2 यूनिट स्थापित की जा रही हैं, हर यूनिट से तीनों चरणों में 220 मेगावाट क्षमता ऊर्जा का उत्पादन होगा। इस नवाचार से बैटरी का उपयोग दिन में दो बार होगा, जिससे लागत में कमी आएगी। कुल मिलाकर सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में 440 मेगावाट सप्लाई होगी। दो परियोजनाओं का मिश्रण है मुरैना परियोजना मुरैना परियोजना दो परियोजनाओं का मिश्रण है। जिसमें पहला एक सामान्य सिंगल-चार्ज कम्पोजिट सोलर प्रोजेक्ट है। जिसमें बैटरी को सोलर एनर्जी से चार्ज जाता है। दूसरा स्टोरेज एज ए सर्विस प्रोजेक्ट है, जिसमें अतिरिक्त ग्रिड पावर से रात के समय बैटरी दोबारा चार्ज की जाएगी। इससे सुबह के पीक ऑवर्स की आपूर्ति की जाएगी। इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि बैटरी दिन में दो बार उपयोग की जाएगी। मुरैना परियोजना पीक ऑवर्स और दिन के समय में समान स्तर की आपूर्ति ( हर इकाई से 220 मेगावाट) के लिए एक बेंचमार्क स्थापित करती है।


