सिंगरौली नगर निगम अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहे विपक्षी दलों के पार्षदों को कलेक्ट्रेट से बैरंग लौटना पड़ा। वे अपना बयान दर्ज कराने पहुंचे थे, लेकिन कई घंटे इंतजार के बाद भी कोई अधिकारी मौजूद नहीं मिला और उनके बयान दर्ज नहीं हो सके। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और बीएसपी के कुल 22 पार्षद अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में बयान दर्ज कराने कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। यह प्रस्ताव भारतीय जनता पार्टी के निगम अध्यक्ष देवेश पांडे के खिलाफ लाया जा रहा है। पार्षदों को बताया गया कि कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला का तबादला हो गया है और नए कलेक्टर ने अभी कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इसलिए उन्हें शुक्रवार को आने के लिए कहा गया। कुछ पार्षद तो इंतजार करते-करते सभागार में ही सो गए थे। पार्षदों ने जिला प्रशासन पर भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। नेता पुष्पराज सिंह ने कहा कि नगर निगम एक्ट के अनुसार, सूचना देने के 10 दिन के भीतर अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला लेना होता है, लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। विपक्षी पार्षदों ने दो दिन पहले कलेक्टर को अविश्वास प्रस्ताव के लिए आवेदन दिया था। इसके जवाब में, भाजपा के जिलाध्यक्ष, विधायक और नगर निगम अध्यक्ष ने शनिवार को शक्ति प्रदर्शन किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अध्यक्ष पद सुरक्षित है।


