राजस्थान कांग्रेस के बड़े नेता रामेश्वर डूडी का शुक्रवार देर रात बीकानेर में निधन हो गया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे डूडी लंबे समय से बीमार थे। परिवार के अनुसार वे करीब 25 महीने से कोमा में थे। डूडी की पहचान किसान नेता के साथ पेंट-शर्ट वाले जाट नेता के तौर पर भी थी। उनका अंतिम संस्कार आज बीकानेर में ही किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने डूडी के निधन को कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान बताया है। 2 दिन में ज्यादा बिगड़ी तबीयत बीकानेर कांग्रेस (देहात) अध्यक्ष कृष्ण कुमार सियाग ने बताया कि अगस्त 2023 में डूडी की जयपुर में अचानक तबीयत बिगड़ थी, जिसके बाद उन्हें तुरंत एसएमएस अस्पताल ले जाया गया। वहां से उन्हें गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था। उसके बाद वो दिल्ली में अपने घर पर ही इलाज ले रहे थे। कुछ दिन पहले उन्हें फिर से हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था, लेकिन उनकी हालत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ। इसके बाद डॉक्टर्स ने उन्हें घर भेज दिया था। सियाग ने बताया कि शनिवार को दोपहर एक बजे बीकानेर में उनके आवास पर अंतिम दर्शन हो सकेंगे। गांव से दिल्ली तक राजनीति में सक्रिय थे
रामेश्वर लाल डूडी का जन्म 1 जुलाई 1963 को बीकानेर में हुआ। उन्होंने राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में कार्य किया। वे 1999 से 2004 तक बीकानेर से लोकसभा सांसद रहे, लेकिन 2004 में अभिनेता धर्मेंद्र देओल से हार गए। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य रहे। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
उनके पिता जेठा राम डूडी और माता आशा देवी थीं। उन्होंने बीकानेर के बीजेएस रामपुरिया कॉलेज से बी.कॉम. किया। उनके पिता जेठाराम डूडी नोखा के पंचायत समिति के प्रधान रहे। बीमार होने के कारण पत्नी बनी विधायक
1983 में डूडी ने सुशीला देवी से शादी की। डूडी दो साल पहले जब बीमार हुए तो उनके समर्थकों ने सुशीला डूडी को ही चुनाव लड़ने के लिए कहा। ज्यादा दबाव के चलते वो चुनाव लड़ी और जीत भी गई। बीकानेर जिले में कांग्रेस की एकमात्र विधानसभा सीट नोखा से सुशीला डूडी की है। बड़े जाट नेता बने, मुख्यमंत्री के दावेदार थे, चुनाव हारे
डूडी ने स्वयं को राजस्थान का बड़ा जाट नेता साबित किया था। इसी कारण वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में डूडी को मुख्यमंत्री का दावेदार भी माना गया। कांग्रेस की सरकार आई लेकिन खुद डूडी नोखा में भाजपा नेता बिहारीलाल बिश्नोई से चुनाव हार गए। राजनीतिक करियर मां के प्रति समर्पित रहे डूडी रामेश्वर डूडी अपनी मां के निधन पर सबसे ज्यादा रोये। यहां वैध मघाराम कॉलोनी में उनके निवास पर ही मां रहती थी। जब भी बाहर से आते तो मां के पास घंटों बैठे रहते। इधर-उधर की बातें करते। हंसी-मजाक भी करते। रामेश्वर डूडी की मां का निधन हुआ तो वो सबसे ज्यादा रोये। उनके मित्र बताते हैं कि डूडी बच्चों की तरह बिलख पड़े थे। बाइक पर घूमते थे बीमार होने से पहले डूडी कई बार मोटर साइकिल पर ही बीकानेर के पुराने शहर में पहुंच जाते। वहां अपने मित्रों के साथ जमकर हथाई करते थे। खासकर आचार्यों के चौक में कई बार वो दोस्तों के साथ दिखते। वहीं पर देर रात तक गर्म दूध पीने का शौक था। पेंट-शर्ट वाला जाट नेता आमतौर पर जाट नेता कुर्ता और धोती पहनते हैं, कुछ जाट नेता कुर्ता पायजामा पहनते हैं लेकिन रामेश्वर डूी को “पेंट-शर्ट वाला जाट नेता” कहा जाता था। वो हमेशा फिट पेंट के साथ शर्ट पहनते थे। हमेशा शर्ट उनकी पेंट के अंदर तक करीने से लगी होती थी। पेंट पर बेल्ट और नीचे चमड़े के जूते पहनते थे। उनकी स्टाइलिश छवि से हर कोई प्रभावित था। जब भीड़ में पहुंच गए डूडी डूडी के सांसद काल में एक हत्या हुई। मृतक के परिवार ने पीबीएम अस्पताल में बनी मोर्चरी के आगे धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस और आम जनता के बीच भारी तनाव की स्थिति थी। ऐसे में डूडी को धरना स्थल पर नहीं आने की सलाह दी गई। सांसद के वहां पहुंचते ही माहौल बिगड़ सकता था लेकिन इसके बाद भी डूडी वहां पहुंचे। आम लोगों को समझाया और इसके बाद चले गए। विवाद भी खत्म हुआ। अभिनेता धर्मेंद्र को दी कड़ी टक्कर बीकानेर में भाजपा के टिकट पर धर्मेंद्र मैदान में उतरे थे। दोनों के बीच कड़ी टक्कर मानी गई। रामेश्वर डूडी को पता था कि शहरी क्षेत्र के लोग धर्मेंद्र के आकर्षण में आ सकते हैँ लेकिन गांवों में उन्हें लोग पसन्द करते हैं। ऐसे में डूडी ने गांवों में ज्यादा मेहनत की। इसी का परिणाम रहा कि सभी ग्रामीण विधानसभा सीट से डूडी आगे रहे लेकिन शहर में उन्हें भारी अंतर से पीछे रहना पड़ा। धर्मेंद्र को अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए अपने बेटे सन्नी देओल को भी बीकानेर बुलाना पड़ा। अपने कार्यकर्ता के लिए भिड़ जाते डूडी अपने कार्यकर्ता के लिए किसी भी नेता और अधिकारी से भिड़ जाते थे। बीकानेर में बीकेईएसएल कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन के बाद बीकानेर के कई कांग्रेस नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई। इन्हीं में एक आनन्द जोशी बताते हैं कि डूडी ने तत्कालीन गृह मंत्री के घर चलकर इस मामले में बात की और कहा कि जो कुछ हुआ वो पॉलिटिकल इवेंट था। हमारे युवा साथियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं बनती। जब राहुल गांधी ने रोककर बात की बीकानेर के करणी सिंह स्टेडियम में साल 2018 में चुनावी सभा थी। मंच के नीचे कई नेता खड़े थे। अशोक गहलोत और डोटासरा भी थे। वहीं पर डूडी भी पंक्ति में खड़े होकर उनका स्वागत कर रहे थे। स्वागत की औपचारिकता के बाद राहुल गांधी फिर से डूडी की तरफ पलटे और उन्हें दूर ले जाकर अलग से बातचीत की। संभवत: चुनाव के संबंध में उन्होंने जानकारी ले रहे थे।


