ग्वालियर जिला न्यायालय ने पिस्तौल और रिवॉल्वर के लाइसेंस की मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल आशंका के आधार पर हथियार का लाइसेंस नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि जब तक किसी व्यक्ति या समूह के लिए वास्तविक और सिद्ध खतरे का सबूत न हो, तब तक लाइसेंस देने का कोई औचित्य नहीं है। यह मामला नाका चंद्रवदनी निवासी बृजमोहन नरवरिया द्वारा राज्य सरकार के खिलाफ दायर याचिका से संबंधित था। आवेदक ने खुद को ठेकेदार बताते हुए सुरक्षा कारणों से हथियार लाइसेंस की मांग की थी। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था कि आवेदक को किसी भी व्यक्ति से कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं है। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार ने लाइसेंस देने से इनकार कर दिया था। हथियार का लाइसेंस अधिकार नहीं याचिकाकर्ता ने न्यायालय में दलील दी थी कि अन्य व्यक्तियों को समान परिस्थितियों में लाइसेंस दिए गए हैं, इसलिए उसे भी अनुमति मिलनी चाहिए। इस पर न्यायालय ने स्पष्ट किया कि हथियार का लाइसेंस कोई अधिकार नहीं है, बल्कि यह एक विवेकाधीन अनुमति है, जिसे लोक शांति और जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही जारी किया जा सकता है।


