चाईबासा स्थित एमपी-एमएलए विशेष न्यायालय में भाजपा नेता अमित शाह पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर चल रहे मानहानि केस की सुनवाई शनिवार को नहीं हो सकी। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ट्रायल के दौरान निजी उपस्थिति से छूट के लिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 205 के तहत आवेदन किया है। इस पर अदालत को 4 अक्टूबर को फैसला सुनाना था। लेकिन न्यायाधीश के अवकाश पर होने के कारण सुनवाई टल गई। अब अगली तारीख 9 अक्टूबर 2025 तय की गई है। 22 सितंबर को पूरी हुई थी बहस राहुल गांधी का केस देख रहे अधिवक्ता सुभाष चंद्र मिश्रा ने बताया कि 22 सितंबर को दोनों पक्षों की बहस पूरी हो चुकी थी। अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद 4 अक्टूबर को फैसला आना था। मगर न्यायाधीश की अनुपस्थिति के चलते सुनवाई नहीं हो पाई। अब सबकी निगाहें 9 अक्टूबर पर हैं, जब अदालत राहुल गांधी के आवेदन पर अपना निर्णय सुनाएगी। फैसले पर टिकी हैं सबकी निगाहें राहुल गांधी का यह आवेदन इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि अदालत उन्हें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देती है, तो वे अपने संसदीय और राजनीतिक कार्यक्रमों में बिना किसी रुकावट के हिस्सा ले पाएंगे। वहीं, अगर अदालत उनका आवेदन खारिज कर देती है, तो उन्हें हर सुनवाई में मौजूद रहना पड़ेगा। कांग्रेस समर्थकों और पार्टी नेताओं की नजरें भी इसी फैसले पर हैं। उनका कहना है कि राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर काफी व्यस्त रहते हैं, ऐसे में हर बार अदालत पहुंचना उनके लिए संभव नहीं है। दू
सरी ओर, अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता केशव प्रसाद महतो का कहना है कि कानून सबके लिए समान है, इसलिए राहुल गांधी को भी अदालत में नियमित रूप से उपस्थित रहना चाहिए। क्या है पूरा मामला यह केस 28 मार्च 2018 को कांग्रेस के एक कार्यक्रम में दिए गए राहुल गांधी के भाषण से जुड़ा है। उस दौरान भाजपा नेता अमित शाह को लेकर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। इस बयान के खिलाफ भाजपा नेता प्रताप कटियार ने चाईबासा सीजीएम कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया था। बाद में यह मामला एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। अब 9 अक्टूबर को यह साफ होगा कि राहुल गांधी को सुनवाई से छूट मिलती है या उन्हें हर बार अदालत में हाजिर होना पड़ेगा।


