पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति के छात्रों को पोस्ट मैट्रिक छात्र वित्तीय सहायता योजना के भुगतान को लेकर पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस विकास बहल ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार बार-बार यह बहाना बना रही है कि केंद्र से 60 प्रतिशत राशि नहीं मिली है, जबकि उपलब्ध रिकॉर्ड बताते हैं कि केंद्र ने अपनी वित्तीय जिम्मेदारी पूरी कर दी है और आवश्यक राशि जारी कर दी गई है। यह विवाद 2017 से 2020 के बीच छात्रों के वित्त से जुड़ा है। याचिकाकर्ता संस्थानों का कहना है कि उन्होंने छात्रों की पढ़ाई का खर्च उठाया, लेकिन पंजाब सरकार ने अभी तक बकाया राशि जारी नहीं की है। उनका तर्क है कि उनका अनुबंध सीधे राज्य सरकार के साथ है, इसलिए पूरी राशि पंजाब सरकार को दी जानी चाहिए। केंद्र से कोई भी बकाया राशि लेना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्र सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के दौरान पंजाब सरकार ने स्वयं कोई बजट प्रावधान नहीं किया था, जिसके कारण छात्र वित्तीय सहायता वितरित नहीं की जा सकी। केंद्र ने यह भी कहा कि 2020 से पैसा सीधे छात्रों के बैंक खातों में जा रहा है, जिससे उस समय के बाद कोई विवाद नहीं है। अदालत ने माना कि पंजाब सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है और बार-बार गलत तर्क पेश कर रही है। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता संस्थान बार-बार अदालत का दरवाज़ा खटखटा रहे हैं, जबकि राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी थी कि वह पूरी राशि जारी करती और बाद में केंद्र के साथ उसका मिलान करती। अदालत ने पंजाब सरकार को आखिरी मौका देते हुए आदेश दिया कि अगली सुनवाई से पहले एक हलफनामा दाखिल किया जाए, जिसमें प्रत्येक वर्ष (2017-18, 2018-19, 2019-20) की कुल वित्तीय देनदारी का ब्योरा हो। राज्य की प्रतिबद्धता, संस्थाओं को जारी की गई राशि और केंद्र से प्राप्त राशि का विवरण प्रस्तुत किया जाए। मामले की सुनवाई अब 17 नवंबर, 2025 को होगी। अदालत ने पंजाब के समाज कल्याण विभाग के निदेशक को व्यक्तिगत रूप से और विभाग के प्रमुख सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का आदेश दिया है। शिदअ नेता कलेर ने उठाए सवाल शिरोमणि अकाली दल के नेता और वकील अर्शदीप सिंह कलेर ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अदालत के आदेश के बाद साफ है कि सरकारें अपना काम सही ढंग से नहीं कर रही हैं। भले वह कांग्रेस की सरकार और या फिर आम आदमी पार्टी की सरकार एससी स्कालरशिप के पैसे को लेकर गबन किए गए हैं। अब सरकार को बताना होगा कि यह पैसा कहां गया।


