तमिलनाडु के बाद एमपी में भी कफ सिरप बैन:कोल्ड्रिफ से हुई थी 9 बच्चों की मौत; राजस्थान में ड्रग्स कंट्रोलर सस्पेंड

कफ सिरप से मध्यप्रदेश और राजस्थान में 11 बच्चों की मौत के बाद दोनों में राज्यों में दवाएं बैन कर दी गई हैं। एमपी में शनिवार को कोल्ड्रिफ (Coldrif) सिरप बेचने पर रोक लगा दी। उधर, राजस्थान में डेक्सट्रोमेथोरपन हाइड्रोब्रोमाइड कफ सिरप और उसे बनाने वाली कंपनी केसंस फॉर्मा को भी प्रतिबंधित कर दिया गया। इस कंपनी का प्लांट जयपुर में है। कोल्ड्रिफ (Coldrif) दवा की मैन्युफैक्चिरंग तमिलनाडु के कांचीपुरम में हो रही थी। बच्चों की मौत के बाद तमिलनाडु सरकार ने गुरुवार को उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। राज्य में इस दवा के थोक और रिटेल स्टॉक को सीज कर दिया गया है। एमपी में कोल्ड्रिफ से 26 दिन 9 बच्चों की मौत एमपी के छिंदवाड़ा में कप सिरप पीने से 9 बच्चों की मौत हुई। पहला संदिग्ध मामला 24 अगस्त को सामने आया था। पहली मौत 7 सितंबर को हुई थी। इसके बाद 15 दिन में किडनी फेल होने से एक-एक कर 6 बच्चों की मौत हो गई।
इनकी किडनी के स्वैब सैंपल लिए गए। इसकी जांच में डायएथिलीन ग्लाइकॉल दूषित पाया गया। छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज डॉ. पवन नांदुलकर शिशु रोग विशेषज्ञ ने बताया कि एक कफ सिरप 80% बच्चों में कॉमन है। प्रारंभिक जांच में कफ सिरप में गड़बड़ी की ही बात सामने आ रही है। इसके बाद 2 अक्टूबर को 2 और बच्चों ने दम तोड़ा।
मध्य प्रदेश के अफसरों का दावा है कि यहां लिए गए 13 सैंपलों की जांच में तीन सिरप के सैंपल पास हो गए हैं। राजस्थान के भरतपुर और सीकर में 2 मौतें
राजस्थान में कप सिरप पीने से भरतपुर और सीकर में एक-एक मौतें सामने आईं। शुरुआती जांच में Dextromethorphan hydrobromide syrup ip का नाम सामने आया। यह दवाई एक निजी फार्मा कंपनी कैसंस फार्मा तैयार करती है। यहां भी बच्चों की मौत की वजह किडनी फेल होने की बात बताई गई। इसके बाद शनिवार को सरकार एक्शन में आई। राजस्थान सरकार ने कैसंस फार्मा की सभी 19 प्रकार की दवाइयों पर रोक लगा दी है। राज्य के ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को निलंबित कर दिया। तमिलनाडु में एमपी के पत्र के बाद 48 घंटों में एक्शन
एमपी के ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्या ने बताया था कि स्वास्थ्य विभाग ने दोनों कफ सिरप (coldrif व Nextro DS) का प्रोडक्शन रुकवाने तमिलनाडु और हिमाचल को पत्र लिखा है। तमिलनाडु सरकार ने मप्र की ओर से पत्र मिलते ही 24 घंटे के भीतर कोल्ड्रिफ सिरप (बैच नंबर SR-13) का सैंपल लेकर जांच कराई। इसमें डाईएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) 48.6% मिला, जो एक विषैला पदार्थ है। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके तुरंत बाद पूरे तमिलनाडु में इसके उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया। केंद्र सरकार ने एडवाइजरी जारी की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को हेल्थ एडवाइजरी जारी करके कहा कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप (खांसी और सर्दी की दवाएं) न दी जाएं। सरकार ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत की खबरों के बाद एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले DGHS ने एडवाइजरी में कहा कि आमतौर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए। इससे बड़े बच्चों को यदि कफ सिरप दिया जाए तो उनका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। यानी जिस बच्चे को दवा दी जा रही है, उसे कड़ी निगरानी में रखा जाए। उसे ​​उचित खुराक दी जाए। कम से कम समय के लिए दवा दी जाए। कई दवाओं के साथ कफ सिरप नहीं दिया जाए। DGHS की डॉ. सुनीता शर्मा ने यह एडवाइजरी जारी की है। ————————- कफ सिरप से मौत से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… बच्चों के सिरप में कूलेंट वाले केमिकल का कंटेंट:इससे किडनी-दिमाग पर बुरा असर, इन सॉल्वेंट का इस्तेमाल गैरकानूनी मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में किडनी फेल होने से 7 बच्चों की मौत हो चुकी है। 7वें बच्चे ने नागपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ा। जिन दवाओं से बच्चों को आराम मिलना चाहिए था, वही उनकी मौत की वजह बन गईं। पूरी खबर पढ़ें… राजस्थान में 2 बच्चों की मौत; ड्रग कंट्रोलर ने नकली दवाओं की परिभाषा बदली, कई फार्मा कंपनियों को बचाया सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली कफ सिरप पीने से 2 बच्चों की मौत के साथ ही तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आ रहे हैं। फूड सेफ्टी ड्रग कंट्रोलर डिपार्टमेंट के अधिकारी फार्मा कंपनियों को बचाने में जुटे हैं। अधिकारी ने नकली दवाइयां बनाते पकड़ी गई कंपनियों को बचाने के लिए एक्ट की परिभाषा ही बदल दी। पूरी खबर पढ़ें…

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