मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के छोटे से गांव विचारपुर के युवा खिलाड़ियों ने बड़ा इतिहास रच दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ‘मिनी ब्राजील’ के नाम से देशभर में चर्चित हुई इस टीम के पांच खिलाड़ी और उनकी कोच अब जर्मनी पहुंच चुके हैं। यहां वे FC Ingolstadt 04 जैसे प्रतिष्ठित फुटबॉल क्लब में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण ले रहे हैं। प्रधानमंत्री के उल्लेख के बाद जर्मनी के इस क्लब ने 4 से 12 अक्टूबर तक विचारपुर की टीम को विशेष प्रशिक्षण का अवसर दिया है। शनिवार सुबह खिलाड़ी म्यूनिख पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत हुआ। इसके बाद टीम ने क्लब के स्पोर्ट्स सेंटर, जिम सेशन और स्किल्स लैब एरीना का दौरा किया। यहीं से उनके अंतरराष्ट्रीय सफर की असली शुरुआत हुई। कोच सिखा रहे आधुनिक तकनीक
जर्मनी में खिलाड़ियों को कोच डाइट मार बीयर्सडॉर्फ के मार्गदर्शन में फिटनेस, बॉल कंट्रोल, पासिंग, शूटिंग, और डिफेंस-अटैक जैसी आधुनिक फुटबॉल तकनीकों की गहन ट्रेनिंग दी जा रही है। खास जोर टीमवर्क, निर्णय क्षमता और टैक्टिकल इंटेलिजेंस पर है- यानी मैदान में तुरंत रणनीतिक निर्णय लेने की क्षमता। कोच बीयर्सडॉर्फ के अनुभव से खिलाड़ी न केवल तकनीकी रूप से सशक्त बन रहे हैं, बल्कि उन्हें यूरोपीय फुटबॉल के अनुशासन, फिटनेस और टीम संस्कृति को भी करीब से समझने का मौका मिल रहा है। भारत से जर्मनी तक का सफर
विचारपुर की पांच खिलाड़ी सानिया कुंडे, सुहानी कोल, प्रीतम कुमार, वीरेंद्र बैगा और मनीष घसिया अपनी कोच लक्ष्मी सहीस के साथ 2 अक्टूबर को भोपाल से रवाना हुए। टीम दिल्ली होते हुए 4 अक्टूबर की सुबह म्यूनिख पहुंची। यह प्रशिक्षण 12 अक्टूबर तक चलेगा, जिसके बाद 13 अक्टूबर को टीम भारत लौटेगी। पूरे कार्यक्रम के दौरान भारतीय एंबेसी टीम के साथ समन्वय बनाए रखे हुए है। खेल मंत्री सारंग ने दी बधाई राज्य के खेल मंत्री विश्वास सारंग ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि विचारपुर के इन खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा गांवों में भी किसी कमी के बिना मौजूद है। अब ये युवा जर्मनी में जो सीखेंगे, वह आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश के फुटबॉल को नई दिशा देगा। विचारपुर की टीम को यह अंतरराष्ट्रीय पहचान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से मिली। उन्होंने 30 जुलाई 2023 को अपने मन की बात कार्यक्रम में इस टीम की चर्चा करते हुए इसे ‘मिनी ब्राज़ील’ कहा था। प्रधानमंत्री के उस एक उल्लेख ने इस छोटे से गांव के बच्चों को वैश्विक मानचित्र पर पहुंचा दिया।


