इंदौर के शीतला माता बाजार इलाके से विशेष वर्ग के कर्मचारियों और कारीगरों को हटाने के मामले पर लगातार राजनीति हो रही है। पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह इंदौर दौरे पर पहुंचे तो शहर कांग्रेस अध्यक्ष ने उनके दौरे पर सवाल उठा दिए। अब बीजेपी के सीनियर लीडर और पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने दिग्विजय सिंह और राहुल गांधी पर सवाल उठाए हैं। नरोत्तम: जिस तरह के मामले देखने को मिल रहे हैं। मीडिया में दिखते हैं खासकर सोशल मीडिया में वीडियो दिखते हैँ कहीं पर थूकते हुए, पेशाब करते हुए, गंदे नाले में फल धोते हुए। जब इस तरह की घृणास्पद चीजें आती हैं तब इस तरह के विचार पैदा होते हैं। बल्कि ये होना चाहिए कि जिस सोशल मीडिया पर वो वीडियो आया है वो उसकी पुष्टि करे और सत्यता को प्रमाणित करके चलाए। लेकिन, वातावरण इस तरह का बना है वो खराब न हो ये सबको देखना चाहिए। नरोत्तम: दिग्विजय सिंह प्रदेश में दंगा कैसे हो सकता है वो इसके पीछे रहते हैं। शांति भंग कैसे हो सकती है वो इसके पीछे रहते हैं। मैं दो–तीन उदाहरण देता हूं। खरगोन में दंगा हुआ उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर मस्जिद पर भगवा लहराते हुए फोटो डाला। वास्तविकता ये नहीं थी बाद में उन्होंने हटाया। पहली कोशिश में तो वे सफल हो जाते हैं। ये वही दिग्विजय सिंह हैं जब उज्जैन में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे तो ये उनके बचाव में आए गए और बताने लगे कि वो काजी साहब जिंदाबाद के नारे थे। ये वही दिग्विजय सिंह जिन्हें जाकिर नाईक में शांतिदूत नजर आता था। ये उसे शांतिदूत कहते थे। थोड़ा पीछे जाएंगे तो बाटला हाउस एनकाउंटर में सोनिया गांधी को आतंकवादी की मौत पर अश्रु धारा बहाने के लिए नले गए थे वो दिग्विजय सिंह थे। भगवा को आतंकवाद कहने की तरफ किसी ने शब्द बढ़ाया था तो उनमें दिग्विजय सिंह का हाथ था। ये वही दिग्विजय सिंह हैं जिन्हें गाय के गोबर से बदबू आती है। कहते हैं गाय हमारी माता कैसे हो सकती है? ये जरूर कहते हैं वो। आज तक आपने बकरी के बारे में नहीं सुना होगा कि उन्होंने कुछ कहा है? लेकिन गाय के बारे में जरूर बोलते हैं। राहुल गांधी जब देखो सनातन, हिन्दू या हिन्दुत्व पर बोलते हैं। Gen-Z की तरफ बढ़ाना चाहते हैं क्योंकि ये कहीं भी देश के बाहर जाते हैं तो भारत का अपमान कैसे होगा ये इनकी मूल ख्वाहिश रहती है। भारत में दंगे कैसे हो जाएं? आज नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान के लोग चाहते हैं कि हम भारत की तरह विकसित हो जाएं। हमारी इकोनॉमी मजबूत हो जाए। लेकिन, कुछ ऐसे नटकटे नेता इस देश के हैं जो चाहते हैं कि हमारा भारत, नेपाल जैसा हो जाए। हमारा भारत पाकिस्तान जैसा हो जाए जहां आटे की लाइन लग रही हो। जहां आटे के लिए मारामारी होती है। इस देश में प्रधानमंत्री मोदी जी के आने के बाद एक रूपया किलो गेहूं चावल मिल रहा है। बहुत बड़ा अंतर है। आज भारत की बढ़ती हुई ताकत कुछ नेताओं से सहन नहीं होती। राहुल गांधी जब भी देश के बाहर जाते हैं वो भारत के खिलाफ बोलते हैं। अभी कल ही कनाडा में बोल दिया। जो बात वहां जाकर कह रहे हो यहां भी तो कह सकते हैं। कोरोना की वैक्सीन बनी और भारत का नाम हुआ तो उन्होंने कह दिया कि ये तो भाजपा की वैक्सीन है। कोरोना की वैक्सीन है ही नहीं। केस हार जाएं तो कोर्ट पर सवाल, चुनाव हार जाएं तो ईवीएम पर सवाल उठाते हैं। पहले कहते थे ईवीएम खराब है अब कह रहे कि वोट चोरी हो रहे। नरोत्तम: पहले रीवा में एक मकान में हजार नाम निकले थे। अभी भी उदाहरण दिया तो कर्नाटक का दिया जहां उनकी सरकार है। आपके कर्मचारी, आपका ही प्रशासन है। उदाहरण वहां का दिया है जहां 95% हिन्दू नाम हैं। सवाल जड़ में है मूल रोहिंग्याओं और बांग्लादेश से आए हुए लोगों का है। उनके वोट न कट जाएं। उदाहरण दिया वहां का और बिहार की उस पट्टी पर पदयात्रा की। नरोत्तम: जहां पर इनकी इंडी गठबंधन की सरकारें हैं वहीं से आ रहे हैं। चाहे वो झारखंड हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो। जहां भी इंडी गठबंधन या कांग्रेस की सरकारें हैं। वो उनको वोटर कार्ड, राशन कार्ड बनाकर दे रहीं हैं। जब वो नाम जोड़ते हैं तो ऐसे वे दिल्ली तक आ जाते हैं। हमारी सरकार तो छंटनी कर रही है। नरोत्तम: कांग्रेस के जिलाध्यक्ष ने जो बात कही है वो दिग्विजय सिंह को इसलिए हजम नहीं होगी क्योंकि दिग्विजय जी हर विवादास्पद विषय पर किसी की अनुमति नहीं चाहते क्योंकि आज की परिस्थिति कांग्रेस में उनका वजूद समाप्त हो गया है। जनता के अंदर तो 15–20 साल पहले खत्म हो गया था। अब कांग्रेस के अंदर पहली बार वजूद खत्म होना प्रारंभ हुआ है। अभी तक वो कांग्रेस के बडे़ नेता थे लेकिन, जब से कमलनाथ जी का बयान आया तब से उनका वजूद खत्म होने लगा। उसके बाद से उन्हें विवादास्पद विषय में जाना ही पडे़गा। अन्यथा मीडिया उन्हें चर्चा में ही नहीं लेगा। नरोत्तम: राष्ट्रीय नेता तो ऐसा कोई नहीं जिसे जिलाध्यक्ष बना दिया हो। पद होना अलग बात है लेकिन फ्रेम में फिट होना अलग बात है। ये अब कुछ भी कर लें। किसी को भी बनाएं खराबी इंजन में है, ये बार–बार डिब्बों को बदल रहे हैं। उससे कुछ नहीं होगा। नरोत्तम: राहुल गांधी। नरोत्तम: भले खरगे राष्ट्रीय अध्यक्ष हों। ऐसे मनमोहन सिंह 10 साल प्रधानमंत्री रहे। लेकिन नेता तो कभी नहीं बने। कांग्रेस के नेता तो सोनिया गांधी, राहुल गांधी कहलाए। जनता के नेता तो कभी नहीं रहे। मनमाेहन सिंह प्रधानमंत्री होने के बाद कांग्रेस के नेता नहीं थे। कांग्रेस के नेता सोनिया जी, राहुल गांधी थे। ऐसे ही खरगे जी हैँ ये केवल नाम के लिए हैं। नरोत्तम: हमारे मुख्यमंत्री मोहन यादव सतत प्रयासरत रहते हैं। दीनदयाल जी के चरैवैति–चरैवेति के मंत्र पर चलते हैं। मोहन जी इतना प्रवास करते हैं कोई ऐसा दिन नहीं जिस दिन उन्होंने विश्राम किया हो। लगातार प्रदेश की योजनाओं के लिए दिल्ली से पैसे लेकर आने का प्रयास करना। नौजवानों को रोजगार देने के लिए इन्वेस्टर समिट प्रदेश, देश, विदेश सब जगह की हैं। फोन पर उपलब्ध रहते हैं। मैं स्वयं का अनुभव बता रहा हूं कभी मोबाइल पर मिस्डकॉल छोड़ दिया तो कॉल बैक आता है। ऐसे नेता कम हैं जो अपने पास मोबाइल रखते हों और कॉल अटेंड न कर पाएं तो बाद में कॉल बैक कर लेते हैं। नरोत्तम: ऐसा बिल्कुल नहीं हैं कोई भटकता नहीं मिला होगा। सब समरस हो गए। बाकी थोड़ा समय रहता ही है। और लाखों तो हो ही जाने थे जब हमने बूथ को लक्ष्य रखा था। 64 हजार पोलिंग्स पर एक दिन में जॉइनिंग एक साथ हुई थी। उसमें पूर्व केन्द्रीय मंत्री से लेकर पूर्व मंत्री, वर्तमान विधायक, पूर्व विधायक सभी बड़ी संख्या में आए। और परिणाम सबने देखा प्रधानमंत्री जी का आभामंडल, मोहन जी की मेहनत थी ही लेकिन, वातावरण बनाने में न्यू जॉइनिंग टोली का बड़ा योगदान है। नरोत्तम: मैं अपनी इच्छा व्यक्त कर देता हूं कि मैंने कभी नाम नहीं चलाया और हमेशा इस बात का खंडन किया कि मुझे काम चाहिए पद नहीं चाहिए। पार्टी कितना देगी। 30 साल विधायक और 15 साल मंत्री रखती है तो और कितना देगी? पार्टी ने काम लगातार दिया। विधानसभा चुनाव हारने के बाद न्यू जॉइनिंग टोली का संयोजक बनाया। उसके बाद महाराष्ट्र चुनाव में भेज दिया। फिर दिल्ली चुनाव में भेज दिया था। पार्टी काम लगातार दे रही है। नरोत्तम: आगे बढ़ने के लिए किसी पद की जरूरत बिल्कुल नहीं मानता। वास्तव में अगर आपके अंदर हुनर है तो अंगीकार स्वीकार सभी हो जाते हैं। कभी कभी राजनीति परिस्थिति जन्य भी रहती है लेकिन मेरा मानना है कि बढ़ने के लिए किसी पद की जरूरत नहीं होती। भास्कर: विपक्ष सवाल उठाता है कि आपकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पा रहा? नरोत्तम: हमारे यहां लगातार चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। अभी गुजरात में अध्यक्ष का चुनाव हुआ। विपक्ष इसलिए सवाल उठाता है क्योंकि जैसे कांग्रेस पार्टी में तो भाई बहन और माता जी तीनों को बैठकर तय करना है। तीन लोगों की पार्टी है कांग्रेस में तीनों को तय करना है। सपा में पति–पत्नी बैठकर तय कर लेंगे कौन अध्यक्ष बनेगा। आरजेडी, शिवसेना में पिता–पुत्र को तय करना है। हमारे यहां करोड़ों कार्यकर्ताओं का संगठन है। भाजपा में नड्डा जी के बाद कौन बनेगा ये आप–हम नहीं बता सकते। साधारण कार्यकर्ता आकर बनता है ये हम सबके लिए गर्व की बात है। इसमें कार्यकर्ता को ऊंची उड़ान भरने के लिए काफी अवसर हैं। ये भाजपा में हैं बाकी पार्टियां नहीं परिवार हैं। नरोत्तम: बिल्कुल नहीं, पद वाला तो सवाल ही नहीं हैं। काम की इच्छा है। वो चलता रहेगा। नरोत्तम: भाजपा के गठबंधन की सरकार बनेगी। लोगों ने लालू का राज देखा है। बीच में आ गए थे जैसे यहां 15 महीने के लिए कमलनाथ आ गए थे ऐसे वे बिहार में आ गए थे? नरोत्तम: सरकार तो जिस दिन से बनी थी उसी दिन गिरना तय हो गया था। जिस तरह से दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ का मंत्रिमंडल बनाया था पहली बार के लोग कैबिनेट मंत्री बन गए थे। अपने बेटे, भतीजे, भांजे की खातिर जैसा मंत्रिमंडल बनाया था उसमें छह बार और चार बार के विधायक मंत्रिमंडल से बाहर रह गए थे। उसी दिन दिग्विजय सिंह ने शिलान्यास कर दिया था सरकार गिरने का। उसके बाद अघोषित रूप से पर्दे के पीछे से दिग्विजय सिंह ने चलाया। वो पहली सरकार होगी जिसके मंत्री कह रहे थे रेत माफिया, शराब माफिया को दिग्विजय सिंह का संरक्षण है। मंत्री कहते थे लिफाफा लेकर जाओ तब काम होता है। जब ऐसी स्थिति किसी सरकार की बनती है तो उस सरकार का जाना तय हो जाता है। मुख्यमंत्री दिन भर चलो–चलो करते थे। विधायकों की कहीं कोई सुन नहीं रहा था। अधिकारी राज हो गया था फिर बाद में दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ पर डाल दिया और कमलनाथ ने दिग्विजय सिंह पर डाल दिया। तो सरकार तो अपने आप अपने ही बोझ से गिर जाने वाली थी। नरोत्तम: यूपी में दस साल से कौन गृह मंत्री है? उप्र के मुख्यमंत्री जी भी गृह मंत्री हैं मप्र से डबल लोकसभा सीटें और आबादी भी है। जब वहां चल सकता है तो यहां क्यों नहीं चल सकता? महाराष्ट्र में कौन गृह मंत्री है ? ये मुख्यमंत्री जी का प्रिविलेज है। वो किसको कब कौन सा विभाग देना चाहते हैं वो देते हैँ। नरोत्तम: मुख्यमंत्री जी से मिल लें क्या दिक्कत है? वो हर जिले में पहुंच रहे हैं। ऐसा कोई जिला नहीं बचा जहां वे न पहुंचे हों अब जिला क्या वो गांवों तक पहुंच रहे हैं। भास्कर: जीतू पटवारी ने एक विषय उठाया कि मप्र गोमांस पर जीरो जीएसटी कर दी? नरोत्तम: जीएसटी मप्र थोड़े ही करता है केन्द्र सरकार लगाती और हटाती है। ये उनका सोच होगा कि उन्होंने किस तरह से की है। लेकिन, ये केन्द्र के विषय हैं केन्द्र ही जीएसटी हटाती और लगाती है। नरोत्तम: मेरे कहने की बात नहीं है कांग्रेस लोग जिस तरह से गुटबंदी पर सवाल उठा रहे हैं। दो दिन पहले अरूण यादव की चिट्ठी आई उसके पहले कमलेश्वर पटेल ने सवाल उठाए। प्रभारी पर सवाल उठ रहे, अध्यक्ष पर सवाल उठ रहे। ये कांग्रेस का अंतर्कलह है ये जीतू पटवारी को काम करने नहीं देगा। दिग्विजय सिंह के बेटे का जिलाध्यक्ष पर लाकर जिस तरह का जो हश्र हुआ है वो प्रदेश अध्यक्ष का आगे नेतृत्व करने का सपना देखते थे। वो जीतू पटवारी को स्थिर रहने नहीं देंगे। और इन्हें पता नहीं चलेगा कि अटैक कहां से हो रहा है। जैसे हार्ट अटैक, बीपी को सायलेंट किलर कहते हैं। ये दिग्विजय सिंह भी साइलेंट किलर हैं। जब तक दिग्विजय सिंह हैं तब तक मप्र में कांग्रेस की सरकार आने का सोचना भी बेकार है। नरोत्तम: मैं काम करना चाहता हूं। पद नहीं, काम चाहिए। पार्टी ने पद बहुत दिया है। 30 साल विधायक 15 साल कोई मंत्री रहे तो पर्याप्त होता है दूसरों को अवसर देना चाहिए। आने वाली पीढ़ी को अवसर देना चाहिए। शुरुआत ऐसे होना चाहिए।


