11 दिन से वेंटिलेटर पर डेढ़ साल की धानी:किडनी ने काम करना बंद किया, दिमाग तक पहुंचा जहर; पिता बोले- सोचा दवा है, निकला जहरीला सिरप

मेरी बेटी सिर्फ डेढ़ साल की है। 4 दिन तक डॉक्टर की बताई दवा पिलाई। अब वह 11 दिन से वह वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। ये शब्द हैं छिंदवाड़ा जिले के जूनापानी गांव के नवीन देहरिया के। उनकी मासूम बेटी धानी जहरीले सिरप का शिकार हो गई। नवीन ने कहा कि धानी की किडनी काम करना बंद कर चुकी है और अब जहर उसके दिमाग तक पहुंच चुका है। शरीर पर अब किसी भी दवा या गोली का असर नहीं हो रहा। यहां नागपुर में डॉक्टर कह रहे हैं कि बीमारी के बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है। अस्पताल के गलियारों का सन्नाटा और धानी की बिगड़ती सेहत हर बीतते पल के साथ हमारी उम्मीदें तोड़ रही हैं। बता दें, नागपुर के परासिया क्षेत्र के ही चार और बच्चे भर्ती हैं। सभी बच्चों की हालत लगभग एक जैसी है। सभी के परिजन वहां असहाय बैठे हैं। छिंदवाड़ा जिले का यह मामला न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश की दवा व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है। 12 दिन में बदल चुके 4 अस्पताल
नवीन देहरिया ने बताया कि सबसे पहले 24 सितंबर को बेटी को बुखार आया। वे इलाज के लिए परासिया के स्पेशलिस्ट डॉ. प्रवीण सोनी के पास गए। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। खांसी की शिकायत होने पर डॉक्टर ने कोल्ड्रिफ सिरप दिया। नवीन के अनुसार, चार दिन तक वही सिरप पिलाया और साथ में डेंगू के इंजेक्शन लगे। लेकिन, 28 सितंबर की रात अचानक बच्ची को उल्टी आने लगी। हमने फिर डॉ. सोनी को दिखाया, उन्होंने कहा कि किडनी में इन्फेक्शन है और हमें परासिया के सरकारी अस्पताल भेज दिया। वहां से हमें छिंदवाड़ा भेज दिया गया। टेस्ट हुए और किडनी की समस्या पाई गई। इसके बाद धानी को छिंदवाड़ा से नागपुर रेफर कर दिया गया। तब से हम यहीं हैं लेकिन बच्ची को एक प्रतिशत भी आराम नहीं मिला है। पिता का दर्द- ना नेता, ना अधिकारी ने पूछा हाल
नवीन देहरिया का कहना है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी अब तक किसी अधिकारी या नेता ने फोन तक नहीं किया। सरकार कह रही है कि फार्मा कंपनियों पर कार्रवाई होगी। लेकिन हम जानते हैं कि दोषी लोग पैसे भरकर छूट जाएंगे और बच्चों की जान का कोई मोल नहीं रहेगा। सरकार को अब सिर्फ बयान नहीं बल्कि ठोस कदम उठाने चाहिए। गाइडलाइन 0.1%, लेकिन मिला 48.6% जहरीला केमिकल
मध्यप्रदेश एफडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि गाइडलाइन के अनुसार कफ सिरप में अधिकतम 0.1 प्रतिशत डाईथाइलीन ग्लॉयकाल की मौजूदगी स्वीकार्य है। लेकिन जांच में सामने आया कि कोल्ड्रिफ सिरप में यह मात्रा 48.6 प्रतिशत थी। यह बेहद घातक और जानलेवा स्तर है, जिससे किडनी फेल और ब्रेन डैमेज जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं। इससे जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… 1. 11 मौतों के बाद भी एक्शन क्यों नहीं? एमपी के छिंदवाड़ा में किडनी फेल होने से एक और बच्चे की मौत हो गई। शनिवार को नागपुर में इलाज के दौरान डेढ़ साल की योगिता ठाकरे ने दम तोड़ दिया। जिले में एक महीने में अब तक 11 बच्चों की जान जा चुकी है। पूरी खबर यहां पढ़ें… 2. 9 बच्चों की मौत वाले कफ सिरप में 48% जहर ​​​​​​मप्र के छिंदवाड़ा में 9 बच्चों की मौत की वजह बताए जा रहे कफ सिरप में जहरीले केमिकल की मिलावट है, इसकी तमिलनाडु सरकार ने भी पुष्टि कर दी है। जांच में खुलासा हुआ है कि कोल्ड्रिफ कफ सिरप में 48.6% डाईथाइलीन ग्लॉयकाल की मिलावट है। ये एक जहरीला केमिकल है। पढ़ें पूरी खबर… 3. मौतें जारी हैं…किडनी फेल से फिर बच्चे की मौत छिंदवाड़ा में अज्ञात बीमारी से किडनी फेल होने के बाद एक और बच्चे की मौत हो गई। शनिवार को दीघावानी के विकास यदुवंशी (4) ने नागपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। रविवार दोपहर को उसका अंतिम संस्कार किया गया। पढ़ें पूरी खबर… 4. 6 बच्चों की मौत वाला सिरप तमिलनाडु-हिमाचल से आया छिंदवाड़ा में किडनी फेल होने से 6 बच्चों की मौत के बाद कलेक्टर ने कोल्ड्रिफ (Coldrif) और नेक्सट्रो-डीएस (Nextro-DS) बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया। बच्चों की मौत के पीछे इन दोनों सिरप को जिम्मेदार माना जा रहा है। पढ़ें पूरी खबर… 5. राजस्थान में कफ सिरप से तीसरे बच्चे की मौत
राजस्थान में कफ सिरप से शनिवार को तीसरी मौत हो गई। चूरू के 6 साल के बच्चे को तबीयत बिगड़ने पर जयपुर रेफर किया था। यहां जेके लोन अस्पताल में इलाज के दौरान बच्चे ने आज सुबह 10 बजे दम तोड़ दिया। इससे पहले भरतपुर और सीकर में सिरप पीने से दो बच्चों की मौत हो चुकी है। पढ़ें पूरी खबर

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