सरकारी दवा पीने से बच्चों की मौत के मामले में कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। रविवार को पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने जयपुर में विरोध रैली निकाल दवा घोटाले के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इसके साथ ही कार्रवाई नहीं होने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी। प्रताप सिंह खाचरियावास ने कफ सिरप पीने से बच्चों की कथित मौत के मामले में सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध मार्च का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि सरकार की लापरवाही और स्वास्थ तंत्र की नाकामी के कारण मासूमों की जान जा रही है। राज्य में घटिया दवाओं और कफ सिरप की बिक्री पर कोई नियंत्रण नहीं है। सरकार और प्रशासन इस पर आंख मूंदे बैठे हैं। खाचरियावास ने कहा कि अगर सरकार ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई और जिम्मेदार अधिकारियों और कंपनियों पर कार्रवाई नहीं की गई। तो कांग्रेस इसका राज्यव्यापी आंदोलन करेगी। बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता को जवाब चाहिए कि आखिर बाजार में जहरीला सिरप कैसे पहुंचा और जांच अब तक क्यों नहीं हुई है। खाचरियावास ने सरकार से मांग की कि सभी दवाओं और सिरप की लैब जांच अनिवार्य की जाए। इसके साथ ही जो भी इस मामले में दोषी है, उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को तत्काल निलंबित किया जाए। कांग्रेस के विधायक अमीन कागजी ने कहा कि राजस्थान की भाजपा सरकार 2 साल से पूर्व सरकार की योजनाओं को बंद करने का काम कर रही है। बच्चियों और महिलाओं को मुफ्त में दिए जाने वाला सैनिटरी नैपकिन का बीजेपी सरकार के गठन के बाद से अब तक टेंडर तक नहीं हुआ है। अस्पताल में मरीजों को फ्री में दवा और इलाज नहीं मिल रहा है। ऐसी नकारा और निकम्मी सरकार को जनता जल्द उखाड़ फेंकेगी। बता दें कि पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने सिविल लाइंस स्थित अपने आवाज से पैदल मार्च की शुरुआत की। पैदल मार्च सिविल लाइंस से 22 गोदाम सर्किल होते हुए सचिवालय के नजदीक स्वास्थ्य भवन तक पहुंचा। जहां उनके साथ मौजूदा विधायक अमीन कागजी, रफीक खान के साथ ही पूर्व विधायक गंगा देवी और कांग्रेस के सांगानेर से विधायक प्रत्याशी पुष्पेंद्र भारद्वाज के साथ बड़ी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता और नेता मौजूद रहे। लेकिन विरोध रैली में कांग्रेस जयपुर शहर अध्यक्ष आर. आर. तिवाड़ी शामिल नहीं हुए। जिसको लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई है।


