भिंड शहर के निराला रंग बिहार मेला मैदान में रविवार को सरस्वती महाअर्चना कार्यक्रम का भव्य आयोजन जैन मुनि संत विहसंत सागर महाराज के सानिध्य में हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन समाज के लोगों ने भाग लिया। इस दौरान जैन संत ने कहा गुरु की कृपा होती है तो प्रभु की कृपा होती है जब दोनों की कृपा होती है तो संसार का कोई भी शक्ति आपका कुछ बिगाड़ नहीं सकती। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए संत विहसंत सागर महाराज ने कहा कि समाज ने मंदिर बहुत बना लिए, पुजारी बहुत नियुक्त कर लिए, अधिकारी भी तैयार कर लिए, लेकिन अब समय है कि संतों के ठहरने के लिए आश्रम और भवनों की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि जब भी जैन मुनि चंबल क्षेत्र में आते हैं, तो ठहरने की परेशानी का सामना करना पड़ता है। अगर इस दिशा में समाज ने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में संतों का इस क्षेत्र में आगमन कठिन हो जाएगा। अभी पंचम काल चल रहा
संत सागर महाराज ने कहा- “साधु नहीं रहे, तो समझ लेना कि छठवें काल का प्रारंभ हो गया है, अभी पंचम काल चल रहा है।” उन्होंने समाज से आग्रह किया कि जब भी शादी या मांगलिक अवसर हो, तो संयमित दिनचर्या और धार्मिक संस्कारों का पालन किया जाए। उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि भिंड की नीना जैन के परिवार ने संतों की सेवा से कैसे जीवन में उन्नति पाई। कहा- “जब मैं छुल्लक अवस्था मे उनके घर पहली बार गया, तो सभी रोने लगे थे, लेकिन आज उसी परिवार की बिटिया मुंबई में 90 लाख रुपए के पैकेज पर कार्यरत है, और बेटा प्रियंक जैन कतर में नौकरी कर रहा है। तीर्थ स्थल और 73 मंदिरों का उद्धार किया गया
विहसंत सागर महाराज ने बताया कि समाज के सहयोग से बरासों तीर्थ स्थल और 73 मंदिरों का उद्धार किया गया है। जल्द ही ‘विराग विद्यापीठ’ की स्थापना की जाएगी, जहां समाज के बच्चे शिक्षा प्राप्त करेंगे। उन्होंने अंत में कहा कि “संतों की सेवा करो, गुरु और प्रभु की कृपा हो जाए तो संसार की कोई ताकत कुछ नहीं बिगाड़ सकती।” इस मौके पर मेला प्रसार में बड़ी तादात में जैन समाज के लोग मौजूद रहे। भिंड के अलावा ग्वालियर झांसी आगरा इटावा समय अन्य कई शहरों से को आए और उन्होंने हिस्सा लिया धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लेकर लोगों ने सरस्वती महाअर्चना पूजा पाठ किया।


