भास्कर न्यूज |दुमका दुमका के रामगढ़ प्रखंड के केन्दुआ टीकर गाँव में रविवार को खेरवाड़ सांवता एभेन बायसी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विभिन्न ग्रामों के माँझी बाबा और लेखाहोड ने हिस्सा लिया । जिसमें मुख्य रूप से माक् मोडें काराम पर्व और सप्ताहिक मंझी थान पूजा पर गहन चर्चा हुई। बैठक में माक् मोडें काराम पर्व की महत्ता पर विस्तार से बात हुई। संताल आदिवासी समुदाय में यह पर्व तब मनाया जाता है, जब गाँव में किसी तरह की दुःख-तकलीफ दूर होती है, या फसल अच्छी नहीं होने की स्थिति में मांगी गई मन्नत पूरी हो जाती है। दुःख-तकलीफ दूर होने पर सभी ग्रामीण एकजुट होकर यह महापर्व मनाते हैं। इस पर्व के दौरान, गुरुओं द्वारा धरती की उत्पत्ति, मानव जाति की उत्पत्ति, और जन्म से मरण तक के जीवन चक्र पर चर्चा की जाती है। संताल समुदाय स्वयं को पिलचु हाडाम और पिलचू बुढी का वंशज मानता है, जिनके 7 लड़के और 7 लड़कियाँ हुईं, और आगे चलकर यह समुदाय 12 गोत्रों में विभाजित हुआ। माह मोड़े काराम विनती में हिहिडी, पिपिडी, चाय-चाम्पा, खोज कामान, शिर गाढ, शिकारगाड जैसे श्रेष्ठ एवं पवित्र किलों का भी वर्णन मिलता है।सर्वसम्मति से ग्रामीणों और बायसी ने इस वर्ष माक् मोडें काराम महापर्व को 26 से 27 अक्टूबर 2025 को मनाने का निर्णय लिया।


