छिंदवाड़ा में कफ सिरप (Coldrif), (Nextro-DS) पीने से 14 बच्चों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बैतूल में भी कफ सिरप की वजह से दो बच्चों की जान जाने की बात सामने आई है। भोपाल के हमीदिया अस्पताल में 8 सितंबर को बैतूल निवासी 4 साल के बच्चे कबीर की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि सर्दी-जुकाम होने पर डॉक्टर ने उसे जो कफ सिरप दिया था, उसे पीने के बाद बच्चे की हालत बिगड़ी और उसकी किडनी खराब हो गई। बेटे की जान बचाने के लिए पेशे से किसान पिता कैलाश यादव ने अपनी तीन एकड़ जमीन साढ़े चार लाख रुपए में गिरवी रख दी। इलाज पर करीब 5 लाख रुपए खर्च कर दिए। अब पिता ने अपनी जमीन वापस दिलाने और आरोपी डॉक्टर व दवा कंपनी पर कार्रवाई की मांग की है। इसी तरह जामुन बिछुवा गांव के निखलेश ने भी अपने बेटे गर्मित को खो दिया। इलाज में 80 हजार से ज्यादा खर्च हो गए लेकिन बेटा नहीं बच सका। दूसरी तरफ, बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने जांच की बात कही है। हालांकि वे जांच से पहले ही कोल्ड्रिफ सिरप से बच्चों की मौत से इनकार कर रहे हैं। पहले जानिए 4 साल के कबीर के साथ क्या हुआ…? पिता बोले- दवा और डॉक्टर ने बेटा-जमीन दोनों छीना
कलमेश्वरा गांव के रहने वाले कबीर के पिता कैलाश यादव बार-बार अपने मोबाइल पर बेटे की फोटो देखकर उसे याद करते हैं। उन्होंने उस कफ सिरप की शीशी भी संभालकर रखी है। वे कहते हैं- इस कोल्ड्रिफ की वजह से मेरा बच्चा चला गया। जमीन भी छिन गई। अब सरकार डॉ. सोनी पर कार्रवाई करे। दवा कंपनी पर कार्रवाई हो, मेरी जमीन छुड़वा दो। एक हफ्ते के इलाज में 5 लाख का खर्च आ गया। इसके लिए मैंने अपनी तीन एकड़ जमीन गिरवी रख दी थी। डॉ. सोनी ने भी 20 हजार रु लिए, पर बच्चे को मौत दे दी। कोल्ड्रिफ और डॉक्टर की वजह से बच्चा भी गया, जमीन भी गई। किडनी खराब हो गई थी। मेरी जमीन वापस मिल जाए। सर्दी-जुकाम के इलाज से बिगड़ी तबीयत
कबीर को 24 अगस्त को सर्दी-जुकाम हुआ था। कैलाश उसे परासिया के डॉ. सोनी के पास ले गए। डॉक्टर ने ‘कोल्ड्रिफ’ कफ सिरप समेत तीन दवाएं लिखीं। सिरप को दिन में चार बार तीन-तीन एमएल देने के लिए कहा गया था। चार दिन तक यह दवा देने के बाद 29 अगस्त को बच्चे की तबीयत और बिगड़ गई। कबीर की पेशाब बंद हो गई। उसे खून की उल्टियां होने लगीं। खर्च के लिए गिरवी रखी 3 एकड़ जमीन
बेटे की हालत बिगड़ती देख कैलाश ने इलाज के लिए पैसों का इंतजाम करना शुरू किया। 30 अगस्त को उन्होंने गांव के ही सीताराम पटेल के पास अपनी तीन एकड़ जमीन साढ़े चार लाख रुपए में गिरवी रख दी। सीताराम ने उनसे कहा था- पैसे लौटाओ तो जमीन वापस मिलेगी। कफ सिरप देने के बाद हालत और बिगड़ी
कैलाश बताते हैं- डॉक्टर ने कहा था दिन में चार बार कोल्ड्रिफ सिरप दो। जैसे-जैसे सिरप देते गए, हालत और बिगड़ती गई। पेशाब बंद हो गया, खून आने लगा। जब मैंने पूछा तो डॉक्टर नाराज हो गया। अब जांच होनी चाहिए। सिरप ने मारा या इलाज में लापरवाही हुई। अब जानिए ढाई साल के गर्मित को क्या हुआ था…? इलाज में 80 हजार खर्च, फिर भी बेटा नहीं बचा
जिले के जामुन बिछुवा गांव के निखलेश धुर्वे ने भी अपने ढाई साल के बेटे गर्मित को खो दिया। निखलेश कहते हैं- मेरे पास कुछ नहीं था। आंध्र से 40 हजार रुपए लाया था। गांव में 40 हजार उधार लिए, फिर भी डॉक्टर एक के बाद एक दूसरे के पास भेजते रहे। इलाज में ही 80 हजार से ज्यादा खर्च हो गया, पर मेरा बेटा नहीं बचा। अब सिर पर उधार अलग चढ़ गया है। जब हम निखलेश के गांव पहुंचे तो वह अपने बेटे की तेरहवीं कार्यक्रम में व्यस्त थे। मां बोली- बेटे की पर्चियां भी कब्र में दफना दी
गर्मित की मां फुलकारी कहती हैं- हम इतने गरीब हैं कि बेटे की दवा के साथ उसकी रिपोर्ट और पर्चियां भी कब्र में ही दफना दी। हमारे पास अब कुछ नहीं बचा। उसे परासिया इलाज के लिए ले गए थी। दवा लेकर दूसरे दिन आई तो उसने बाथरूम करना बंद कर दिया था। मैं दूसरे दिन बोर्देही अस्पताल ले गई। वहां से मुझे बैतूल भेज दिया। बैतूल वाले डॉक्टर ने भोपाल भेजा, वहां तीन-चार दिन इलाज के बाद हम बेटे को लेकर वापस आ गए। यहां गांव में चार दिन बाद उसने 1 अक्टूबर को दम तोड़ दिया। गर्मित के शव को घर के पीछे बाड़ी में ही दफना दिया। अब परिवार पर 80 हजार रुपए का कर्ज है। कलेक्टर बोले- बच्चों की मौत की जांच कर रहे
इस मामले में बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने जिले में कोल्ड्रिफ सिरप से दोनों बच्चों की मौत की खबर से इनकार किया। उन्होंने कहा- दोनों बच्चों का इलाज जिले के किसी भी अस्पताल में नहीं हुआ। कबीर की मृत्यु अन्य जिले में, जबकि गर्मित की मृत्यु परासिया में इलाज के बाद हुई। स्वास्थ्य विभाग, पुलिस या प्रशासन को इस संबंध में कोई सूचना या शिकायत नहीं मिली है। मेडिकल टीम के निरीक्षण में यह भी पाया गया कि बैतूल जिले में कोल्ड्रिफ सिरप का विक्रय नहीं हो रहा है। कलेक्टर के मुताबिक बच्चों का प्राथमिक उपचार परासिया के डॉ. प्रवीण सोनी द्वारा किया गया था। मृत्यु का स्पष्ट कारण अभी तक सामने नहीं आया है। मामला बैतूल जिले से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित नहीं है, फिर भी जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग को जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। ये खबर भी पढ़ें…
अब तक 16 मौतें, 14 की पुष्टि:दवा कंपनी पर FIR, डॉक्टर गिरफ्तार-निलंबित
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया में 14 बच्चों की मौत की पुष्टि के बाद आखिरकार प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार रात जिले के परासिया थाना में डॉ. प्रवीण सोनी और श्रेसन फार्मास्युटिकल कंपनी (कांचीपुरम, तमिलनाडु) के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पढ़ें पूरी खबर…


