सिटी रिपोर्टर | बोकारो शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर यानी सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन बंग समुदाय के लोग कोजागरी लक्खी पूजा तो मिथिलांचल के लोग कोजागरा पूजा करेंगे। ओडिया समाज की महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए गज लक्ष्मी की पूजा और यूपी वाले शरद पूर्णिमा करेंगे। वहीं, मराठी समाज के पंडित के अनुसार शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण ने इसी पूर्णिमा की रात गोपियों के साथ महारास किया था। इसलिए इसे रास पूर्णिमा के रूप में भी जाना जाता है। पंडित डीके झा ने बताया कि इस वर्ष शरद पूर्णिमा 6 अक्टूबर की सुबह 11:24 बजे से शुरू होगी और 7 अक्टूबर को सुबह 09:16 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा की रात में चांद की रोशनी में खीर रखने की परंपरा है। इसलिए मां लक्खी पूजा, कोजागरा में कौड़ी खेलने की परंपरा 6 अक्टूबर की रात ही मनाई जाएगी। भारत विविधताओं का देश है। सभी स्थानों, क्षेत्रों, भाषा-भाषियों की अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता है। इन्हीं में से मिथिलांचल की परंपरा अपने-आप में अनूठी है। यहां विवाह के बाद से लेकर साल भर तक भांति-भांति के पारंपरिक उत्सवों का चलन रहा है। इन्हीं में से एक है कोजागरा, जिसे मनाने की परंपरा मिथिलांचल में प्राचीन काल से ही कायम है। बोकारो में रह रहे मिथिलांचलवासी 06 अक्टूबर, को गीत-संगीत के रंगारंग कार्यक्रमों के साथ कोजागरा उत्सव मनाएंगे। मैथिलों की प्रतिष्ठित संस्था मिथिला सांस्कृतिक परिषद के तत्वावधान में संचालित सेक्टर-4 स्थित मिथिला एकेडमी पब्लिक स्कूल में संध्या 06:30 से कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। ओडिया समाज : चांद की पूजा पूर्णिमा की रात चांद देखने के बाद कन्याएं पूजा करेंगी। इस दौरान बासी केले से चांद बनाएंगी। महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए मां गज लक्ष्मी की पूजा करेंगी। गुड़, केला, ईख, सुपारी, खीरा, नारियल, झोगा आदि चीजों को तुलसी पेड़ के नीचे रख कर सूर्योदय के पहले पूजा की जाएगी। तेलुगु समाज में गौरी पूजन की है प्रथा शहर में रह रहे तेलुगु समाज के गंवारा जाति के लोग शरद पूर्णिमा के दिन गौरी पूजा करते हैं। इस मौके पर घरों में और सामूहिक रूप से भी कार्यक्रम का आयोजन पूरे विधि-विधान से होता है।


