पुलिस इन्वेस्टिगेशन अनटोल्ड स्टोरी:टायरों के निशान से खोली दो अनसुलझी मर्डर मिस्ट्री; ऐसा पहला केस, जिसमें मृतक महिला की आज तक पहचान नहीं

2 जून 2024 की सुबह 5 बजे नींद खुली ही थी कि सूचना मिली कि करधनी में महिला की लाश मिली है। चेहरा कटा हुआ। आला अधिकारियों के साथ घटनास्थल पहुंचा। निर्वस्त्र शव पर धारदार हथियार से गंभीर चोटों के निशान थे। अपराधियों ने शव फेंकने के लिए सुनसान सड़क चुनी थी। वहां न रोड लाइट थी, ना सीसीटीवी कैमरे। पूरी तरह ब्लाइंड मर्डर। सबसे पहले एफएसएल और डॉग स्क्वाड से घटनास्थल की गहन जांच की। सामने आया कि मृतका को गाड़ी से उतार कर डंप किया गया है। शव के पास टायरों के साफ निशान थे। पता चला कि रात 2 बजे बारिश हुई थी। इससे अनुमान लगाया कि शव रात 2 से सुबह 6 बजे से फेंका है। सबसे पहले सभी थानों से सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा के एक्सपर्ट कांस्टेबलों का चयन किया। सुनसान रोड के दोनों सिरे से जुड़ी हर लिंक रोड के कैमरों को खंगाला। दो से छह बजे के बीच उस रोड से आने-जाने वाले 600 वाहनों की सूची बनी। इनमें से 250 की पहचान की गई। रोड पर एंट्री और एग्जिट टाइम का विश्लेषण किया तो सामने आया कि एक मिनट में वाहन एक से दूसरे सिरे पर आराम से पहुंच रहे हैं। एक ओमनी वाहन को एक मिनट से अधिक समय लगा। आसपास के सीसीटीवी कैमरों से ओमनी का पीछा कर पुलिस उस जगह पहुंची जहां से अपराधी निकले थे। आरोपी आशाराम और राहुल को पकड़ा। जांच में खुलासा हुआ कि ये आरोपी देह व्यापार का खिलाफ विरोध करने वाली पीड़िता की नृशंस हत्या के आरोपी थे। मृतका दूसरे राज्य की निवासी थी, जिसकी पहचान उसके दस्तावेजों से हुई और परिवार को सूचित किया गया। पूछताछ में एक और अहम खुलासा हुआ। लगभग दो वर्ष पूर्व कालवाड़ थाना क्षेत्र में भी एक युवती का इसी तरह चेहरा कटा शव मिला था। एफएसएल जांच में कपड़ों व शरीर पर मेल डीएनए मिला था। पकड़े गए आरोपियों के डीएनए सैंपल लेकर एफएसएल भेजे गए। वहां से पता चला कि ये वहीं आरोपी हैं। इनका एफएसएल मिलान हुआ है। पीड़िता किसी अनजान शहर से आई थी। उसने भी देह व्यापार और जबरदस्ती संबंधों को विरोध किया तो निर्मम हत्या कर दी थी। उसका पहचान पत्र, फोन आरोपियों में जला दिए थे। वारदात पुरानी होने से सीडीआर विश्लेषण से भी पीड़िता का नंबर पता करना संभव नहीं था। ‘हर अपराध के साक्ष्य घटना स्थल पर मौजूद होते हैं, बस जरूरत है, उन्हें सही ढंग से परखने और संकलन की।’ अपराध शास्त्री डॉ. एडमंड लॉकार्ड का सिद्धांत यही कहता है। देश का संभवतया यह पहला मामला है, जिसमें उस पीड़िता की पहचान तक नहीं हुई और दुष्कर्म व हत्या के आरोपी न केवल पकड़े गए वरन फॉरेंसिक प्रमाणों में जुर्म साबित भी हुआ। -जैसा राजेंद्र गौतम को बताया

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *