गाइड वन्स अगेन ने 1965 की यादें की ताजा:उदयपुर के गाइड और रूसी लड़की के निश्छल प्रेम की कहानी ने बांधे रखा, झील संरक्षण और देश प्रेम का दिया संदेश

उदयपुर में पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित मासिक नाट्य संध्या ‘रंगशाला’ में ‘गाइड वन्स अगेन’ नाटक का मंचन किया गया। नाटक के मुख्य केरेक्टर कुलदीप धाभाई ने अपनी एक्टिंग से सबका दिल जीत लिया। वही अपने हुनर से स्वेतलाना के किरदार में शोना मल्होत्रा ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। इा नाट्य की कहानी साहित्यकार गौरीकांत शर्मा ने लिखी है। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के निदेशक फ़ुरकान खान ने बताया कि प्रति माह आयोजित होने वाली मासिक नाट्य संध्या रंगशाला में ‘गाइड वन्स अगेन नाटक का मंचन हुआ। शिल्पग्राम के दर्पण सभागार में मालिक ऑर्गेनाईजेशन परफॉर्मिंग आर्ट्स की ओर से मंचन हुआ। नाटक में यशस्वी श्रीवास्तव, पायल मेनारिया, निखिल सत्संगी (अमी), अमित व्यास, मानस जैन, यश कुमावत, प्रवर खंडेलवाल, सुखदेव राव, गुनीशा एवं प्रद्युम्न ने विभिन्न भूमिकाओं को जीवंत किया। वस्त्र परिकल्पना रेखा शर्मा की थी वहीं संगीत डिजाइन एवं लाइव गायन दिविषा घारू और अमी का रहा। मेकअप और मंच सज्जा संदीप सेन की थी। उदयपुर की जड़ों से जुड़ा नाटक प्रसिद्ध फिल्म “गाइड” की अधिकांश शूटिंग उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में हुई थी। 1965 में प्रदर्शित इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा को नया आयाम दिया। साथ ही उदयपुर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाई। इसी पृष्ठभूमि को आधार बनाकर प्रस्तुत किया गया नाटक “गाइड – वन्स अगेन ” मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा और विरासत को पुनः जीवंत करने का प्रयास रहा। नाटक की कथा उदयपुर शहर के जगदीश चौक, गणगौर घाट क्षेत्र में एक गाइड राजू और रूस से आई शोधार्थी स्वेतलाना के बीच पनपते निश्छल प्रेम पर केंद्रित रही। इसे बेहद खूबसूरत अंदाज में रंगमंच पर जीवंत किया गया। नाटक के माध्यम से जहां एक ओर उदयपुर की शान झीलों को स्वच्छ और संरक्षित रखने का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर अपनी माटी से जुड़ाव को भी बहुत भावनात्मक रूप से अभिव्यक्ति दी गई। साहित्य और रंगकर्म का संगम यह नाट्य प्रस्तुति फिल्म “गाइड” को रंगमंचीय श्रद्धांजलि रही। इसकी कहानी साहित्यकार गौरीकान्त शर्मा ने लिखी, जबकि नाट्य रूपांतरण, परिकल्पना और निर्देशन शहर के वरिष्ठ रंगकर्मी शिवराज सोनवाल ने किया। दर्शकों ने इसे एक यादगार अनुभव बताया, जिसने उन्हें उस जादुई एहसास से रूबरू कराया जिसने “गाइड” को कालजयी बनाया और उदयपुर को विश्व मानचित्र पर स्थापित किया। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के सहयोग से नाटक के सफल मंचन के साथ ही उदयपुर की सांस्कृतिक धरोहर को पुनः पहचान दिलाने की दिशा में यह आयोजन मील का पत्थर साबित हुआ।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *