प्रदेश की सरकारी बिजली निगमों के टैरिफ आदेश की सबसे बड़ी मार मध्यम वर्ग और बड़े उद्योगों पर पड़ी है। हर माह औसतन 400 यूनिट बिजली खपत करने वाले मध्यम वर्ग का बिजली बिल 490 रु. तक बढ़ेगा। यह हर माह का 14 प्रतिशत अतिरिक्त आर्थिक भार होगा। वहीं नई टैरिफ में पहली बार उपभोक्ताओं पर एक रु. प्रति यूनिट तक रेगुलेटरी सरचार्ज लगाने, स्थायी शुल्क बढ़ाने के साथ ही लोड फैक्टर पर मिलने वाली छूट खत्म कर दी गई है। ऐसे में स्टील और आयरन सहित बड़े उद्योगों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। 300 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वालों पर भार ज्यादा
प्रदेश में 300 यूनिट से ज्यादा बिजली खर्च करने वालों पर बड़ा भार पड़ेगा। औसतन 400 यूनिट बिजली खर्च करने पर पहले 7.65 रु. प्रति यूनिट की रेट लगती थी, लेकिन अब इसे कम कर 7 रु. प्रति यूनिट कर दिया गया है। यानि 65 पैसे प्रति यूनिट राहत दी गई है। आंकड़ों में देखें तो 400 यूनिट पर 260 रु. कम हुए हैं। लेकिन स्थायी शुल्क 450 से बढ़ाकर 800 रु. कर दिया गया। साथ ही, एक रु. प्रति यूनिट रेगुलेटरी सरचार्ज बढ़ा दिया। यानी अब करीब 490 रु. ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा। उद्योगों पर दोहरी मार : 1 रु./ यूनिट की छूट खत्म, 1 रु. सरचार्ज बढ़ा
स्टील कारोबारियों का कहना है कि बेसिक रेट तो 7.30 रु. प्रति यूनिट से 6.30 रु. प्रति यूनिट की गई है। लेकिन रेगुलेटरी सरचार्ज से फ्यूल सरचार्ज 28 पैसे बढ़ाकर एक रु. यूनिट पहुंच गई। छोटे उद्योगों को 60 पैसे प्रति यूनिट महंगी बिजली मिलेगी। बड़े उद्योगों में लोड फैक्टर 50% रखने पर पहले एक रु. प्रति यूनिट की छूट थी, अब वह खत्म हो गई। स्थायी शुल्क को 300 रुपए प्रति केवीए से 380 रु. प्रति केवीए कर दिया गया है। इससे स्टील बनाने वाली इंडक्शन फर्नेस इंडस्ट्रीज को बिजली सवा रुपए यूनिट महंगी मिलेगी। ऐसे में स्टील इंडस्ट्रीज को काफी चुनौती का सामना करना होगा।


