जयपुर हादसे के बाद अब कोटा के अस्पतालों में फायर सेफ्टी की जांच होगी। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (दक्षिण) राकेश व्यास ने बताया कि सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में फायर उपकरणों की जांच की जाएगी। यह देखा जाएगा कि स्मोक डिटेक्टर और अन्य उपकरण काम कर रहे हैं या नहीं। अगर कोई कमी मिली, तो उसे तुरंत ठीक करवाया जाएगा। ये होंगे इंतजाम मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने कहा कि जहां लोगों की जान को खतरा हो सकता है, वहां फायर सेफ्टी के मजबूत इंतजाम जरूरी हैं। सरकारी अस्पतालों में सरकार उपकरण देती है, लेकिन इनकी नियमित जांच होनी चाहिए। स्मोक डिटेक्टर को ठीक रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह आग लगने की पहली चेतावनी देता है। साथ ही, अस्पतालों में प्रवेश और निकास के रास्ते साफ होने चाहिए। इमरजेंसी के लिए अलग निकास की व्यवस्था भी जरूरी है। इन सबकी जांच होगी और कमियां दूर की जाएंगी। विभाग ने कहा-दो साल में होती है जांच अग्निशमन विभाग के सूत्रों ने बताया कि अभी अस्पतालों का फायर ऑडिट हर दो साल में होता है, जिसके बाद दो साल की एनओसी दी जाती है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल ऑडिट होना चाहिए। इससे उपकरणों की खराबी समय पर पकड़ी जा सकती है। अगर उपकरण काम नहीं करते, तो आपात स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है। हर दिन आते हैं 2 हजार मरीज बता दें कोटा का सबसे बड़ा अस्पताल एमबीएस (महाराव भीमसिंह अस्पताल) और न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल है, जहां रोजाना दो हजार से ज्यादा मरीज आते हैं। ये मरीज कोटा के साथ-साथ बारां, बूंदी, झालावाड़ और मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों से भी आते हैं। ऐसे में कोटा के अस्पतालों में फायर सेफ्टी की जांच होगी।


