गौमूत्र से औषधीय उत्पाद बनाने का प्रयास करें गोसेवक:झाबुआ कलेक्टर ने पशुपालक को दिया सुझाव; डिस्टिलेशन तकनीक बताई

झाबुआ कलेक्टर नेहा मीना ने सोमवार को कल्याणपुरा का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने युवा पशुपालक रुद्र चौहान से मुलाकात की, जो पशुपालन के माध्यम से अपनी आजीविका चला रहे हैं। कलेक्टर ने चौहान को गौमूत्र से औषधीय उत्पादों के निर्माण की दिशा में प्रयास करने का सुझाव दिया। रुद्र चौहान ने कलेक्टर को बताया कि वे स्थानीय बाजार में दूध का वितरण कर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके पास वर्तमान में 10 भैंसें, 2 गाय और 5 भैंस की बछियाएं हैं, जिनके माध्यम से उन्होंने अपने पशुपालन व्यवसाय का विस्तार किया है। कलेक्टर का यह दौरा 2 से 9 अक्टूबर तक प्रदेशभर में चलाए जा रहे “दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान” के तहत था, जिसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करना है। डिस्टिलेशन तकनीक से उत्पाद बनाने की सलाह नेहा मीना ने चौहान ने उन्हें गौमूत्र के औषधीय गुणों को ध्यान में रखते हुए डिस्टिलेशन तकनीक से उत्पाद बनाने की सलाह दी। राज्य स्तर से जिले के लिए नियुक्त नोडल अधिकारी डॉ. भगवान मगनानी ने इस अवसर पर दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में साइलेज के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि साइलेज भूसे से कहीं अधिक पौष्टिक, स्वादिष्ट और सस्ता विकल्प है, जो पशुओं के पाचन के लिए भी अत्यंत लाभदायक है। डॉ. मगनानी ने जानकारी दी कि साइलेज के निर्माण के लिए मक्का की फसल सर्वाधिक उपयुक्त होती है, जिसका झाबुआ जिले में बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। उन्होंने उपस्थित पशुपालकों को घर पर ही साइलेज तैयार करने की प्रक्रिया भी विस्तार से समझाई। इस दौरान उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग डॉ. एएस दिवाकर, डॉ. अमित दोहरे सहित विभागीय अधिकारी, क्षेत्रीय पशुपालक और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

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