मार्च 2022 : डॉ. नरिंदर कौर बीआरटीएस लेन पार करते समय तेज रफ्तार मालवाहन की चपेट में आईं। अवैध वाहन प्रवेश और पैदल पार पथ न होने से हादसा हुआ। जुलाई 2023 : 24 वर्षीय पल्कप्रीत कौर की मौत, शराब के नशे में स्टंट कर रहे युवक की बाइक बीआरटीएस ग्रिल से टकराई। सुरक्षा डिज़ाइन घातक पाया गया। जुलाई 2023 : अवैध बस घुसी, छत पर बैठे प्रवासी मुनेश्वर मांझी का सिर बस स्टॉप की छत से टकराया, मौत हुई। बीआरटीएस बंद होने के बाद हादसे बढ़े। दिसंबर 2023: जनवरी 2024, ग्वालमंडी चौक : ट्रक बीआरटीएस ग्रिल से टकराया, चालक की मौत। रिपोर्ट में 9 ब्लैक स्पॉट बताए, बस सेवा बंद होने के बाद वाहनों का गलत प्रवेश बढ़ा। जनवरी 2024: बटाला रोड ओवरब्रिज : घने कोहरे में ट्रक डिवाइडर से टकराया। चेतावनी संकेत और रिफ्लेक्टर की कमी से बाहरी चालकों को लेन की पहचान नहीं होती। हादसे के बाद ट्राली पर सवार होकर गोल्डन टेंपल की ओर जाती बस में सवार संगत। इन हादसों के अलावा 2020 से अब तक कई बार बीआरटीएस की लोहे की ग्रिलें चोरी या टूटने की घटनाएं सामने आई हैं। बीच सड़क पर नुकीले लोहे के टुकड़े खुले रह जाते हैं, जिनसे वाहन टकरा जाते हैं। नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की लापरवाही के चलते रखरखाव और मरम्मत समय पर नहीं होती। जब बस की छत पर बैठे युवक लेंटर से टकराए तो एक कार सवार ने यह हादसा देख लिया। लेकिन बस ड्राइवर को इसकी भनक तक नहीं लगी और वह बस भगाता रहा। कार सवार ने करीब आधा किलोमीटर तक बस का पीछा किया और तारांवाला पुल के पास जाकर गाड़ी लगाकर बस को रोका। उसने ड्राइवर को बताया कि बस की छत पर बैठे युवक लेंटर से टकराकर गिर गए हैं। बस रोकी गई तो देखा गया कि तीन युवकों की मौत हो चुकी थी और दो गंभीर रूप से घायल थे। हादसे की टक्कर इतनी जोरदार थी कि बीआरटीएस लेंटर का एक हिस्सा भी झूल गया था। उधर, घटना की सूचना मिलते ही एसीपी ईस्ट डॉ. शीतल मौके पर पहुंचीं। उन्होंने खुद बस की छत पर चढ़कर जांच की। एसीपी ने बताया कि बस ड्राइवर को हिरासत में लिया गया है। यह भी जांच की जा रही है कि युवक खुद छत पर बैठे थे या बस में भीड़ की वजह से उन्हें ऊपर बैठाया गया था। बस की छत पर चढ़ते एसीपी ईस्ट डा. शीतल और पास में खड़ीं एसएचओ मकबूलपुरा। प्राइवेट वाहनों का प्रवेश: बीआरटीएस बसें बंद होने के बाद लेन खुला छोड़ दिया गया, जिससे ट्रक, बस, बाइक आदि लेन में घुसते रहे और पैदल यात्रियों तथा ग्रिलों से टकराने की घटनाएं हुईं। डिजाइन की खामियां: लोहे की ग्रिलों तथा बस स्टॉप की छतों की ऊंचाई सही न होने से सिर टकराने और शरीर कटने जैसी दुर्घटनाएं हुईं; कोहरे या रात में उचित रिफ्लेक्टर न होने से हादसे हुए। तेज रफ्तार/शराब का सेवन: कई मामलों में वाहन चालक तेज रफ्तार से स्टंट कर रहे थे या नशे में थे, जिससे नियंत्रण खोने के बाद ग्रिलों से टकराए। पैदल यात्रियों की सावधानी में कमी: डॉ. नरिंदर कौर की दुर्घटना में वे बस लेन पार कर रही थीं, लेकिन मालवाहन के अचानक आने से हादसा हुआ। देख‑रेख की कमी: सुरक्षा ग्रिलों की चोरी, संकेतों के अभाव और टूटी संरचनाओं की मरम्मत न होने से मार्ग खतरनाक बन गया। स्थानीय नागरिक, कुछ ट्रैफिक-विशेषज्ञ और कुछ निगम अधिकारी तक यह सुझाव देते हैं कि “जब बसें नहीं चल रहीं और कॉरिडोर दुर्घटनाओं की वजह बन रहा है, तो उसे सामान्य कर दिया जाना चाहिए।” अमृतसर का बीआरटीएस प्रोजेक्ट दिसंबर 2016 में शुरू हुआ था। दूसरा चरण जनवरी 2019 में चालू हुआ। हालांकि, निजी ऑपरेटर स्वर्ण सतनाम ट्रांसपोर्ट सर्विसेज ने जुलाई 2023 में अनुबंध समाप्त कर दिया क्योंकि सरकार ने उस पर अत्यधिक ईंधन खर्च और बसों की खराब हालत के लिए जुर्माना लगाया था। इसके बाद शहर में मात्र 16 बसें चल रही थीं, और फर्म ने अनुबंध अवधि पूरी होने से तीन वर्ष पहले हाथ खींच लिए। नगर निगम कमिश्नर ने पंजाब रोडवेज को अस्थायी तौर पर सेवा चलाने के लिए कहा, लेकिन पर्याप्त संसाधन न होने से सेवा स्थायी रूप से बंद हो गई। अगस्त 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2024 में छह बसों का प्रतीकात्मक ट्रायल रन किया गया; परन्तु आठ महीने बाद भी नियमित सेवा बहाल नहीं हुई और लगभग 40,000 यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन से वंचित होना पड़ा। जुलाई 2025 की दूसरी रिपोर्ट में बताया गया कि जुलाई 2023 को सेवा बंद होने के बाद केवल छेहर्टा मार्ग पर कुछ बसें चलीं पर जून 2025 में वे भी हटा ली गईं। यह बसें इसलिए बंद हुई क्योंकि, ऑपरेटर को ईंधन में अनियमितता पर भारी जुर्माना लगाया गया। बसों की मरम्मत के लिए रकम का अभाव था। कर्मचारियों की हड़ताल के साथ यातायात दबाव और बसों की संख्या कम थी। इससे हादसे बढ़े। भास्कर न्यूज | अमृतसर शहर की ट्रैफिक समस्या को हल करने के लिए करीब 530 करोड़ रुपए खर्च कर बनाया बीआरटीएस कॉरिडोर खुद हादसों की जगह बन गया है। बीआरटीएस बसें चल नहीं रही, मगर कॉरिडोर के कारण लोगों की जानें जरूर जा रही हैं। सोमवार रात भी नेक्सस मॉल के सामने बीआरटीएस स्टेशन की एलिवेशन से टकराने के बाद बस की छत पर सवार तीन नाबालिगों की मौत हो गई। दो लोग घायल हैं। 10 लोग बाल-बाल बच गए। कॉरिडोर में पिछले 5 साल में 40 से ज्यादा छोटे-बड़े हादसे हुए हैं। इनमें सोमवार के हादसे समेत 10 लोगों की जान जा चुकी हैं। पुलिस हर बार हादसे के बाद कुछ दिन के लिए रास्ते पर रस्सी बांधकर उसे बंद तो कर देती है, लेकिन कुछ दिन बाद फिर खोल देती है। इससे हादसे दोबारा उसी जगह हो जाते हैं। इनमें बटाला रोड, छेहर्टा और एलिवेटेड रोड पर हादसे आम हैं। फिर भी कॉरिडोर को न बंद कि या जाता है और न ही हटाया जा रहा है। कॉरिडोर के खोली होने का फायदा समझकर आम लोग अपने वाहन कॉरिडोर में चढ़ा लेते हैं और हादसे का शिकार होते हैं। दिल्ली में 2016 में कॉरिडोर हटा दिया गया। इसके पीछे ट्रैफिक जाम बढ़ना, लेन में अनुशासन न रहना और जनता की नाराजगी को कारण बताया गया। इसी तरह भोपाल में बीआरटीएस कॉरिडोर हटाकर सामान्य सड़क बना दी गईं, क्योंकि बसों की संख्या कम और निजी वाहन ज्यादा हो गए थे।


