धार्मिक नगरी चित्रकूट में शरद पूर्णिमा पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में सोमवार रात देशभर से करीब 50 हजार दमा रोगी शामिल हुए। सभी ने खुले आसमान के नीचे औषधीय खीर का सेवन किया। मान्यता है कि इस खीर के सेवन से दमा जैसे रोगों में राहत मिलती है। खुले आसमान के नीचे बनती है खीर स्थानीय लोगाें ने बताया कि चित्रकूट में शरद पूर्णिमा के दिन खीर खाने की पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से युक्त होकर अमृत समान किरणें फैलाता है, जिससे खुले में रखी खीर में औषधीय गुण आ जाते हैं। यह खीर खासतौर पर दमा रोगियों के लिए तैयार की जाती है। इसमें दमा में लाभ देने वाली आयुर्वेदिक औषधियां भी मिलाई जाती हैं। कामदगिरि परिक्रमा पथ पर रात्रि में खीर पकाई गई कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए मरीज कामदगिरि परिक्रमा पथ पर रात के समय खीर पकाने की प्रक्रिया में खुद भी शामिल हुए। उपलों की आग पर खीर बनाई गई। फिर उसे पत्तलों में फैलाकर रखा गया और आश्रम के कर्मचारियों ने हर मरीज की खीर में अलग से दमा की औषधि मिलाई। ब्रह्म मुहूर्त में सेवन, फिर डुबकी और परिक्रमा खीर का सेवन ब्रह्म मुहूर्त में किया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में मरीजों ने मंदाकिनी नदी में डुबकी लगाई। कार्यक्रम का अंतिम चरण कामदगिरि की परिक्रमा था, जिसे श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ पूरा करते हैं।


